असम में NRC : सुप्रीम कोर्ट ने कहा व्यक्तिगत मामलों की सुनवाई 26 मार्च को होगी

असम में NRC : सुप्रीम कोर्ट ने कहा व्यक्तिगत मामलों की सुनवाई 26 मार्च को होगी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भारतीय वायु सेना के एक सेवानिवृत अधिकारी की याचिका पर सुनवाई की सहमति व्यक्त की जिन्हें सिर्फ इस आधार पर न्यायाधिकरण द्वारा अवैध प्रवासी घोषित किया गया क्योंकि उनकी बहन को पहले ही विदेशी नागरिक घोषित किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन ने कहा कि इस मामले की सुनवाई इसी तरह के अन्य मामलों के साथ अब 26 मार्च को होगी।

इसके साथ पीठ एक मुस्लिम महिला हमीदा बेगम @ हरला बेगम की याचिका पर भी सुनवाई करेगी जिसमें विदेशी ट्रिब्यूनल के उसे अवैध प्रवासी घोषित करने के फैसले को चुनौती दी गई है जबकि उसका नाम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न्स (NRC) के उस मसौदे में रखा गया था जो 30 जुलाई, 2018 को प्रकाशित हुआ था।

इस दौरान पीठ ने कहा कि यह निर्धारित किया गया था कि अंतिम NRC अधिकारियों द्वारा 31 जुलाई, 2019 की समय सीमा के अनुसार प्रकाशित किया जाएगा। पीठ ने कहा कि आम चुनाव 2019 समाप्त होने के बाद NRC के राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला, अदालत द्वारा तय 31 जुलाई की समय सीमा को पूरा करने के लिए इस काम में पर्याप्त संख्या में कर्मियों को तैनात करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने अदालत को सूचित किया कि केंद्र ने केंद्रीय बलों की 167 कंपनियों को असम में NRC के काम से ना हटाने पर सहमति जताई है। 5 फरवरी को असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (NRC) का कार्य लोकसभा चुनाव के दौरान निलंबित करने के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की जमकर खिंचाई की थी।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति रोहिंटन नरीमन की पीठ ने कहा था कि गृह मंत्रालय NRC की प्रक्रिया को पूरा ना करने पर आमादा है। MHA असम में NRC प्रक्रिया में देरी के लिए सभी प्रकार के बहाने लेकर सामने आ रही है। MHA का संपूर्ण प्रयास NRC की प्रक्रिया को नष्ट करना है।

चीफ जस्टिस ने कहा था कि क्या हमें गृह सचिव को बुलाना चाहिए? क्योंकि AG और SG को इस मामले में ठीक से ब्रीफ नहीं किया जाता। हम NRC के प्रकाशन के लिए समय सीमा 31 जुलाई से आगे नहीं बढ़ाएंगे।

ये कड़ी टिप्पणियां तब की गईं थीं जब अटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि से NRC प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की। AG ने यह भी कहा था कि चुनाव के दौरान MHA को केंद्रीय सुरक्षा बलों की 167 कंपनियां चुनाव में सुरक्षा के लिए वापस लेनी होंगी। उन्होंने यह भी कहा था कि इस मामले में देश की सुरक्षा शामिल है।

पीठ ने कहा था कि हम यह समझ सकते हैं कि नामांकन और चुनाव महत्वपूर्ण हैं लेकिन 3 सप्ताह तक NRC के काम को स्थगित करना संभव नहीं है।

गौरतलब है कि 24 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किया था कि असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स ( NRC ) के अंतिम ड्राफ्ट को 31 जुलाई तक प्रकाशित किया जाना चाहिए।पीठ ने कहा था कि आगामी लोकसभा चुनाव और NRC प्रक्रिया को कर्मचारियों की कमी के कारण एक दूसरे को प्रभावित किए बिना एक साथ चलना चाहिए।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा था कि चुनाव और NRC दोनों महत्वपूर्ण हैं और वो एक दूसरे के लिए बाधा नहीं बन सकते।

वहीं राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला ने पीठ को बताया था कि अंतिम सूची के प्रकाशन को अगस्त या सितंबर तक बढ़ाया जा सकता है क्योंकि NRC के कर्मचारियों को लोकसभा चुनाव के लिए कार्य में लिया जा सकता है। कुल 36.2 लाख लोगों ने NRC में शामिल होने के दावे प्रस्तुत किए हैं। यह उन 40 लाख लोगों में से है जिन्हें NRC के मसौदे में छोड़ दिया गया था। दावों की सुनवाई 15 फरवरी से शुरू होनी है।

इससे पहले 12 दिसंबर 2018 को असम में नेशनल सिटीजन्स ( NRC ) से छोड़े गए 40 लाख लोगों के दावों और आपत्तियों को दर्ज कराने की डेडलाइन सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी थी। पीठ ने असम सरकार की अर्जी पर सुनवाई करते हुए दावों और आपत्तियों की वैरीफिकेशन का डेडलाइन भी 1 फरवरी 2019 से बढ़ाकर 15 फरवरी 2019 कर दी थी। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय लगातार NRC अपडेट की निगरानी कर रहा है।