गुजरात के पूर्व IPS संजीव भट्ट की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की, परिवार की सुरक्षा के लिए हाई कोर्ट जाने को कहा

गुजरात के पूर्व IPS संजीव भट्ट की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की, परिवार की सुरक्षा के लिए हाई कोर्ट जाने को कहा

गुजरात के बर्खास्त आईपीएस अफसर संजीव भट्ट की उस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने परिवार की सुरक्षा के लिए निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था।

शुक्रवार को जस्टिस ए. के. सीकरी और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा कि उनकी याचिका में कोई मेरिट नजर नहीं आ रही है। हालांकि अदालत ने कहा कि वो जरूरी राहत के लिए गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। भट्ट ने अपनी पत्नी के एक सड़क हादसे का शिकार होने के बाद अपने परिवार को सुरक्षा प्रदान करने के लिए ये याचिका दायर की थी।

इससे पहले अक्तूबर 2018 में संजीव भट्ट के खिलाफ चल रहे 22 साल पुराने मामले में जांच बंद करने की याचिका भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी। पीठ ने संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट की अर्जी खारिज करते हुए कहा था कि वो गुजरात हाई कोर्ट में नए सिरे से याचिका दाखिल कर सकती हैं।

गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को गुजरात सीआईडी ने 22 साल पुराने एक मामले में गिरफ्तार कर लिया था। पूर्व आईपीएस अधिकारी और 7 अन्य को 22 साल पहले कथित तौर पर मादक पदार्थ रखने के मामले में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के संबंध में पूछताछ करने के लिए पहले हिरासत में लिया गया था। भट्ट वर्ष 1996 में बनासकांठा जिले के पुलिस अधीक्षक थे।

मामले की जानकारी के अनुसार भट्ट के नेतृत्व में बनासकांठा पुलिस ने वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित को करीब 1 किलोग्राम मादक पदार्थ रखने के आरोप में वर्ष 1996 में गिरफ्तार किया था। उस समय बनासकांठा पुलिस ने दावा किया था कि उक्त मादक पदार्थ जिले के पालनपुर में होटल के उस कमरे से मिला था जिसमें राजपुरोहित ठहरे थे।

पुलिस की जांच में खुलासा किया गया था कि राजपुरोहित को इस मामले में बनासकांठा पुलिस ने कथित तौर पर झूठे मामले में फंसाया था ताकि उसे इसके लिए बाध्य किया जा सके कि वह राजस्थान के पाली स्थित अपनी विवादित संपत्ति हस्तांतरित करे। तभी से संजीव भट्ट जेल में हैं।