कार सेवकों पर गोली चलाने पर मुलायम सिंह के खिलाफ FIR दर्ज करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

कार सेवकों पर गोली चलाने पर मुलायम सिंह के खिलाफ FIR दर्ज करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें 1990 में कार सेवकों पर गोली चलाने के आदेश देने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी।

हालांकि पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने में देरी हुई है इसलिए इसी आधार पर याचिका खारिज की जा रही है। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील का देरी को माफ करने के अनुरोध को ठुकरा दिया।

दरअसल राणा संग्राम सिंह ने 2017 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर 1990 में कार सेवकों पर गोली चलाने का आदेश देने को लेकर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 3 मई 2016 के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी जिसमें ये याचिका खारिज कर दी गई थी। इससे पहले राणा संग्राम सिंह ने लखनऊ पुलिस में मुलायम सिंह के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज करने की गुहार लगाई लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने लखनऊ की निचली अदालत में मुलायम सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए याचिका दाखिल की थी लेकिन निचली अदालत ने राहत नहीं दी।

राणा संग्राम सिंह ने अपनी याचिका में कहा था कि 6 फ़रवरी 2014 को मैनपुरी जिले में आयोजित एक जनसभा में मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि उनके आदेश पर 1990 में पुलिस ने अयोध्या में कार सेवकों पर गोली चलाई थी। ये बयान मीडिया में भी आया था।

गौरतलब है कि 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए हजारों कार सेवक वहां जमा हुए थे और वहां पुलिस ने गोली चलाई थी जिसमें कई कारसेवकों की मौत हो गई थी।

छवि सौजन्य :फर्स्टपोस्ट हिंदी