राफेल : जल्द सुनवाई की मांग पर CJI ने कहा पीठ के गठन पर विचार करेंगे

राफेल : जल्द सुनवाई की मांग पर CJI ने कहा पीठ के गठन पर विचार करेंगे

राफेल मामले में पुनर्विचार व अन्य याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा है कि वो इस मामले के लिए पीठ के गठन पर विचार करेंगे। फिलहाल इस मुद्दे पर 4 याचिकाएं दाखिल की गई हैं।

गुरुवार को वकील प्रशांत भूषण ने राफेल संबंधी याचिकाओं पर जल्द सुनवाई का आग्रह किया। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, "इसके लिए सभी याचिकाओं की सुनवाई के लिए जजों की पीठ का गठन करना आवश्यक है। मुझे देखने दीजिये।"

इससे पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने यह संकेत दिया था कि राफेल मामले में केंद्र द्वारा दायर संशोधन याचिका व याचिकाकर्ताओं की पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई में देरी पक्षकारों द्वारा याचिका में त्रुटियों को ठीक ना करने की वजह से हो रही है।

दरअसल केंद्र ने शीर्ष अदालत के 14 दिसंबर के फैसले को संशोधित करने के लिए दिसंबर, 2018 में ही आवेदन दायर किया था। तत्पश्चात जनवरी में वकील प्रशांत भूषण, अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने मामले को लेकर पुनर्विचार याचिकाएं दायर कीं। लेकिन अभी तक इन याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है।

15 फरवरी को जब एक वकील ने CJI गोगोई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ से यह शिकायत की कि उनकी याचिका को सूचीबद्ध नहीं किया जा रहा है और रजिस्ट्री में देरी हो रही है तो CJI ने मौखिक रूप से कहा, "रजिस्ट्री में गलती नहीं भी हो सकती। कुछ मामलों में चूक वकीलों से भी होती है। वे अपने मामलों की जल्द सुनवाई के लिए समय पर अपनी याचिकाओं में दोष का उपचार नहीं करते हैं।"

राफेल याचिकाओं की सूची में देरी के एक स्पष्ट संदर्भ में CJI ने कहा "दूसरा पक्ष (वकील) इतने निर्दोष नहीं हैं। त्रुटियों को सुधारने के बजाय ये याचिकाकर्ता मीडिया में गए और व्यापक प्रचार कर दावा किया गया।" इस प्रकार उन्होंने यह स्पष्ट किया कि मामले को सूचीबद्ध करने में देरी रजिस्ट्री की वजह से नहीं है बल्कि संबंधित वकीलों की है।

केंद्र ने अपने आवेदन में कहा है कि 36 राफेल जेट के सौदे के मूल्य निर्धारण के बारे में अंग्रेजी व्याकरण में "गलत तरीके से दी गई" जानकारी को 'सील कवर नोट' में प्रस्तुत किया गया। भूषण और अन्य लोगों ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला दोषपूर्ण है। वे चाहते हैं कि शीर्ष अदालत अपने "गलत" फैसले पर फिर से विचार करे, जो राफेल सौदे को बरकरार रखने के लिए "गैर-मौजूद" सीएजी रिपोर्ट पर निर्भर करता है।

उन्होंने कहा है कि काल्पनिक सीएजी रिपोर्ट पर आधारित फैसला केवल "लिपिक या अंकगणित" भूल नहीं है बल्कि यह एक बड़ी त्रुटि है। इसलिए फैसले को वापस लिया जाए।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सीएजी एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है जो केवल संसद के प्रति जवाबदेह है। सरकार का दावा है कि राफेल पर सीएजी की अंतिम रिपोर्ट एक नए रूप में होगी जो तथ्य असत्य है। वास्तव में सरकार सीएजी को निर्देश नहीं दे सकती कि क्या किया जाना चाहिए या क्या नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर सरकारी अधिकारियों पर अदालत में झूठा नोट देने के लिए परजूरी (मिथ्या साक्ष्य देना) का केस चलाने की याचिका भी दाखिल की है।