बिना अनुमति अफसर का ट्रांसफर करने पर CBI के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी माना, कोर्ट उठने तक की सजा और एक लाख का जुर्माना

बिना अनुमति अफसर का ट्रांसफर करने पर CBI के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी माना, कोर्ट उठने तक की सजा और एक लाख का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बिहार शेल्टर होम मामले की जांच कर रहे सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक ए. के. शर्मा का तबादला करने पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के तत्कालीन अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव को अवमानना का दोषी ठहराते हुए कोर्ट के उठने तक अदालत में बैठे रहने की सजा सुनाई।

मंगलवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस संजीव खन्ना पीठ ने राव के अलावा सीबीआई के अभियोजन प्रभारी निदेशक एस. बासु राम को भी ये सजा सुनाई और दोनों पर एक- एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

इस दौरान पीठ ने कहा कि वो इस विचार से हैं कि राव ने कोर्ट के आदेश की अवमानना की है और इसे मामूली गलती नहीं कहा जा सकता है। पीठ ने राव और अटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल के उस अनुरोध को भी ठुकरा दिया जिसमें उनपर दया दिेखाने को कहा गया था।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि अगर 18 जनवरी को शर्मा का सीआरपीएफ में तबादला करने के आदेश पर हस्ताक्षर करने से पहले सुप्रीम कोर्ट को भरोसे में लिया जाता तो आसमान नहीं टूट पड़ता।

वहीं AG ने दलील दी कि नागेश्वर राव का 32 साल का बेदाग करियर रहा है। उन्होंने ये गलती जानबूझकर नहीं की है और उन्होंने बिना शर्त माफी का हलफनामा भी कोर्ट के समक्ष दाखिल किया है। लेकिन इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्होंने 20 साल में किसी को भी अवमानना का दोषी नहीं ठहराया है और वो मानते हैं कि अदालत की गरिमा बरकरार रखी जानी चाहिए।

07 फरवरी को बिहार शेल्टर होम मामले की जांच कर रहे सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक ए. के. शर्मा का तबादला करने पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई और एजेंसी के तत्कालीन अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए थे।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि ये तबादला सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है और अवमानना का फिट केस भी है। पीठ ने शीर्ष अदालत के 02 पुराने आदेशों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया और अदालत से पूर्व अनुमति लिए बिना 17 जनवरी 2019 को शर्मा को सीआरपीएफ में स्थानांतरित करने के लिए राव को अवमानना नोटिस जारी किया। पीठ ने सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला को यह निर्देश दिया था कि वे उन अधिकारियों के नाम बताएं जो शर्मा को जांच एजेंसी से बाहर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया का हिस्सा थे।

पीठ ने अपने पहले के आदेशों का हवाला दिया जिसमें उसने सीबीआई को बिहार शेल्टर होम मामलों की जांच कर रही टीम से शर्मा को नहीं हटाने को कहा था। राव के अलावा पीठ ने अन्य सभी सीबीआई अधिकारियों की उपस्थिति भी मांगी, जो शर्मा की स्थानांतरण प्रक्रिया में शामिल थे। कोर्ट ने अपने आदेश का उल्लंघन करने के लिए सीबीआई के अभियोजन प्रभारी निदेशक एस. बासु राम की उपस्थिति का भी निर्देश दिया था।