सुप्रीम कोर्ट ने श्रीसंत पर आजीवन प्रतिबंध को रद्द किया, BCCI को तीन महीने में फिर से विचार करने को कहा [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने श्रीसंत पर आजीवन प्रतिबंध को रद्द किया, BCCI को तीन महीने में फिर से विचार करने को कहा [निर्णय पढ़े]

क्रिकेटर एस. श्रीसंत की अपील को आंशिक रूप से अनुमति देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को वर्ष 2013 में इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान स्पॉट फिक्सिंग में लिप्त होने पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा लगाए गए आजीवन प्रतिबंध को रद्द कर दिया है।

जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस के. एम. जोसेफ की पीठ ने इस प्रतिबंध को कठोर सजा बताते हुए कहा कि अनुशासनात्मक समिति ने परिस्थितियों को ध्यान में नहीं रखा। कोर्ट ने BCCI की अनुशासनात्मक समिति को 3 महीने के भीतर सजा की मात्रा पर फैसला लेने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि सजा पर फैसला लेने से पहले समिति श्रीसंत के पक्ष को भी सुने। गौरतलब है कि कोर्ट ने केरल के इस क्रिकेटर के खिलाफ अनुशासन समिति द्वारा किए गए अपराध के निष्कर्षों को रद्द नहीं किया है।

1 मार्च को पीठ ने केरल उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ श्रीसंत की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा था जिसमें बीसीसीआई द्वारा लगाए गए आजीवन प्रतिबंध की पुष्टि की गई थी। अगस्त 2017 में केरल उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने बीसीसीआई द्वारा श्रीसंत पर लगाए गए आजीवन प्रतिबंध को हटा दिया था और बोर्ड द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गई सभी कार्यवाही को रद्द कर दिया था। 2 महीने के भीतर उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने बीसीसीआई द्वारा दायर अपील पर एकल पीठ के आदेश को पलट दिया था।

35 वर्षीय इस तेज गेंदबाज ने दावा किया कि वर्ष 2013 के आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग कांड में उनकी संलिप्तता को स्वीकार करने के लिए दिल्ली पुलिस ने उन्हें लगातार "प्रताड़ित" किया और उनके खिलाफ आजीवन प्रतिबंध "पूरी तरह से अनुचित" है। श्रीसंत को जुलाई 2015 में ट्रायल कोर्ट ने कथित स्पॉट फिक्सिंग से जुड़े एक आपराधिक मामले में आरोपमुक्त कर दिया था।

श्रीसंत ने दावा किया कि उन्हें कथित अपराध में अपनी संलिप्तता कबूल करनी पड़ी क्योंकि पुलिस ने उन्हें हिरासत में यातना दी थी और उन्हें व परिवार को फंसाने की धमकी दी गयी थी। वह पिछले 5-6 वर्षों से इस मामले के चलते पीड़ित हैं। लोग चाहते हैं कि वह क्रिकेट खेले। वह बीसीसीआई के प्रति बेहद वफादार थे।

श्रीसंत की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने पीठ के समक्ष कहा कि यह स्थापित नहीं किया गया कि मई 2013 में इंडियन प्रीमियर लीग टीमों राजस्थान रॉयल्स और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच मोहाली में खेले गए मैच में कोई स्पॉट फिक्सिंग की गई थी और इस बात का भी कोई सबूत नहीं था कि क्रिकेटर को इसके लिए कोई पैसा मिला था।

खुर्शीद ने कहा, "टीम (राजस्थान रॉयल्स) और उसके मालिकों पर 2 साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया। यह पूरी तरह से अनुचित है कि उन पर आजीवन प्रतिबंध लगाया गया।" कथित अपराध में शामिल होने के बारे में पुलिस के सामने अपने बयान को स्वीकार करने के बारे में वकील ने कहा, "यह स्वीकारोक्ति दिल्ली पुलिस द्वारा निरंतर यातना के कारण हुई थी। श्रीसंत के अनुसार पुलिस ने धमकी दी थी कि अगर वह यह अपराध नहीं कबूल नहीं करता तो उसके परिवार को फंसाया जाएगा।"

खुर्शीद ने तर्क दिया कि श्रीसंत के खिलाफ "सबूत का मानक" उनके खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों की तुलना में कुछ भी नहीं है और बीसीसीआई की अनुशासन समिति द्वारा जांच कार्यवाही के दौरान उन्हें रिकॉर्ड किए गए टेलीफोन बातचीत के टेप प्रदान नहीं किए गए थे। रिकॉर्ड की गई बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस दावे को पुख्ता करने का कोई सबूत नहीं है कि श्रीसंत को मोहाली में आईपीएल मैच के दौरान एक ओवर में 14 रन देने के लिए पैसे मिले थे।

खुर्शीद ने तर्क दिया कि आरोपों के अनुसार श्रीसंत को 1 ओवर में 14 रन देने थे, लेकिन उन्होंने 13 रन दिए और मैच के दौरान हुई कमेंट्री में यह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होता है कि उन्होंने उस ओवर में ढीली गेंद नहीं फेंकी। उन्होंने कहा कि यह आरोप लगाया गया था कि श्रीसंत ने ओवर शुरू होने से पहले सटोरियों को संकेत देने के लिए अपनी पेंट में एक तौलिया बाँधा था लेकिन उन्होंने वर्ष 2009 से ही मैचों के दौरान तौलिया का इस्तेमाल किया था।

वकील ने तर्क दिया कि श्रीसंत ने मैच के दौरान तौलिए का इस्तेमाल किया था क्योंकि मोहाली में मौसम नम था और वह अपनी हथेली से पसीना पोंछने के लिए तौलिया का उपयोग कर रहा था जो गेंदबाजों के लिए सामान्य बात है। खुर्शीद ने कहा कि दुनिया में कहीं भी किसी क्रिकेटर पर इस तरह से आजीवन प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।