राफेल पर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए केंद्र ने मांगे चार हफ्ते, सुप्रीम कोर्ट ने दिए चार दिन, 6 मई को सुनवाई

राफेल पर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए केंद्र ने मांगे चार हफ्ते, सुप्रीम कोर्ट ने दिए चार दिन, 6 मई को सुनवाई

राफेल पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए शनिवार 04 मई तक का समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई अब 6 मई को करेगा।

मंगलवार को सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस. के. कौल और जस्टिस के. एम. जोसेफ की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल के उस अनुरोध को ठुकरा दिया कि कोर्ट इसके लिए 4 सप्ताह का समय दे। उन्होंने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कोई नोटिस भी जारी नहीं किया है।

इस पर CJI ने कहा कि अगर उन्हें ये शिकायत है कि नोटिस जारी नहीं हुआ तो वो नोटिस जारी कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि वो शनिवार तक जवाबी हलफनामा दाखिल करें और सोमवार को मामले पर सुनवाई होगी।

इस बीच याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि कोर्ट को गुमराह करने वाले अफसरों के खिलाफ परजूरी का मामला चलाने की याचिका पर भी जवाब दाखिल किया जाए। इस पर पीठ ने केंद्र को कहा कि इस मामले में भी केंद्र भी अपना जवाब दाखिल करे।

दरअसल 10 अप्रैल को राफेल पर पुनर्विचार याचिकाओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा उठाई गई प्रारंभिक आपत्ति को खारिज कर दिया था कि याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज "विशेषाधिकार प्राप्त" हैं और अदालत इन दस्तावेजों पर भरोसा नहीं कर सकती।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस. के. कौल और जस्टिस के. एम. जोसेफ की पीठ ने कहा था कि वो राफेल फैसले पर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तारीख तय करेगा। पीठ ने कहा कि वो 'द हिंदू' में प्रकाशित राफेल से संबंधित रक्षा मंत्रालय के गोपनीय दस्तावेज के आधार पर सौदे की प्रक्रिया का न्यायिक परीक्षण करेगा।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट 14 दिसंबर 2018 के फैसले पर प्रशांत भूषण, यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी व अन्य द्वारा दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।