उन्नाव मामला : सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसे के केस को दिल्ली ट्रांसफर करने के फैसले पर 15 दिनों के लिए रोक लगाई, UP की अदालत में ही चलेगा मामला

उन्नाव मामला : सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसे के केस को दिल्ली ट्रांसफर करने के फैसले पर 15 दिनों के लिए रोक लगाई, UP की अदालत में ही चलेगा मामला

उन्नाव मामले में शुक्रवार को एक बार फिर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार के अपने आदेश में संशोधन करते हुए रायबरेली सड़क हादसे मामले को उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर करने के अपने फैसले पर 15 दिनों के लिए रोक लगा दी है। ये मामला अब उत्तर प्रदेश की अदालत में ही चलेगा।

सीबीआई की अर्जी पर हुआ आदेश में संशोधन

पीठ ने ये आदेश सीबीआई की उस अर्जी पर दिया जिसमें कहा गया था कि हादसे की जांच को पूरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एजेंसी को 14 दिनों का समय दिया है। SG तुषार मेहता ने कोर्ट को यह बताया कि इस केस में उसे जेल में बंद आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर व अन्य को हिरासत में लेकर पूछताछ करनी है। लेकिन यूपी की अदालत का कहना है कि केस दिल्ली ट्रांसफर हो चुका है। वहीं दिल्ली में केस अभी पहुंचा नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ ने तुरंत आदेश में संशोधन करते हुए यह कहा कि पीठ के इस केस के ट्रांसफर के आदेश पर 15 दिनों के लिए रोक रहेगी।

बलात्कार पीड़िता के चाचा को रायबरेली जेल से दिल्ली की जेल में किया गया ट्रांसफर

गौरतलब है कि शुक्रवार को ही उन्नाव मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार पीड़िता के चाचा को रायबरेली जेल से तुंरत दिल्ली की तिहाड़ जेल ट्रांसफर करने के आदेश जारी किए हैं।

पीड़िता का इलाज फिलहाल लखनऊ में ही

CJI रंजन गोगोई की पीठ ने पीड़िता की मां की ओर से वकील द्वारा पेश तर्क को मान लिया कि पीड़िता को फिलहाल लखनऊ के अस्पताल में ही रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में सोमवार को सुनवाई करेगा।

जरूरत पड़ने पर SC के सेकेट्री जनरल के पास आने की छूट

साथ ही पीठ ने पीड़िता को अनुमति दी है कि जब भी उसे जरुरत पड़े वो सुप्रीम कोर्ट में सेकेट्री जनरल के पास जा सकते हैं। साथ ही पीठ ने मीडिया को भी निर्देंश दिया है कि वो पीड़िता की पहचान उजागर ना करे।

मामले हुए थे दिल्ली की तीस हजारी अदालत में ट्रांसफर

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बलात्कार पीड़िता की ओर से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर व अन्य के खिलाफ दर्ज पांचों केसों को उत्तर प्रदेश से दिल्ली की तीस हजारी अदालत में ट्रांसफर कर दिया था।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को 2 सप्ताह के भीतर रायबरेली हादसे की जांच पूरी करने का निर्देश दिया था और दिल्ली की तीस हजारी के जिला जज धर्मेश शर्मा को तुरंत ट्रायल शुरू कर सभी केसों की 45 दिनों में सुनवाई पूरी करने के निर्देश दिए थे।

पीठ ने सीबीआई अधिकारियों को कोर्ट में बुलाकर केस की जानकारी लेने के बाद पीड़िता, उसके परिवार, वकील व उसके परिवार को CRPF की सुरक्षा मुहैया कराने को कहा था। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को पीड़िता को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने के निर्देश भी दिए गए थे।