अरावली में अवैध खनन : सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य सचिव को कहा, 15 मार्च तक लगाएं खनन पर रोक

अरावली में अवैध खनन : सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य सचिव को कहा, 15 मार्च तक लगाएं खनन पर रोक

राजस्थान के अरावली क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर सख्ती दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य सचिव को कहा है कि वो 15 मार्च तक अदालत के आदेश का पालन करते हुए राज्य में अवैध खनन पर रोक लगाएं।

शुक्रवार को अदालत में पेश हुए राज्य के मुख्य सचिव को चेतावनी देते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि अगर राज्य द्वारा अदालत के अादेशों का पालन नहीं किया गया तो मुख्य सचिव को 25 मार्च को फिर से अदालत में पेश होना होगा।

पीठ ने कहा कि अरावली अवैध खनन मामले पर राज्य सरकार गंभीरता से काम करे।

दरअसल, 05 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में अरावली क्षेत्र में अवैध खनन को नियंत्रित करने में नाकाम होने पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को फटकार लगाई थी। पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को भी तलब किया था। पीठ ने कहा था कि हमारे आदेश बहुत स्पष्ट हैं, हम राज्य द्वारा अपने आदेशों का अनुपालन चाहते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा था कि पूरा क्षेत्र बुरी तरह से नष्ट हो गया है, कोई भी वनस्पति या जीव नहीं बचा है, आप मिलजुल कर काम कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से यह बताने के लिए कहा कि राज्य सरकार द्वारा अदालत के आदेशों का अनुपालन क्यों नहीं किया गया? वहीं राजस्थान सरकार ने कहा था कि राज्य चुनावों के कारण काम में देरी हुई थी।

इससे पहले पिछले साल अक्तूबर में राजस्थान के अरावली क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर राजस्थान सरकार पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़े सवाल उठाए थे और राज्य सरकार को 48 घंटे के भीतर 115.34 हेक्टर क्षेत्र में गैरकानूनी खनन बंद करने का आदेश दिया था।

जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) की उस रिपोर्ट पर हैरानी भी जताई जिसमें बताया गया कि पिछले 50 साल में अरावली क्षेत्र में 31 पहाड़ियां गायब हो गई हैं।

पीठ ने तब टिप्पणी की थी कि, '31 पहाड़ियां गायब हो गई हैं। यदि देश में पहाड़ियां गायब होंगी तो फिर क्या होगा? क्या लोग 'हनुमान' हो गए हैं जो पहाड़ियां उठाकर ले जा रहे हैं?' पीठ ने आगे कहा था कि, 'राजस्थान में 20 प्रतिशत पहाड़ियां गायब हो गई हैं। यह आपके यहां की सच्चाई है। आप किसे अंधेरे में रखना चाहते हैं। राज्य, अरावली पहाड़ियों को गैरकानूनी खनन से बचाने में विफल हो गया है।'

इसी के साथ पीठ ने कहा था कि हालांकि राजस्थान को अरावली में खनन गतिविधियों से करीब 05 हजार करोड़ रुपए की रॉयल्टी मिलती है। फिर भी दिल्ली में रहने वाले लाखों लोगों की जिंदगी को खतरे में नहीं डाला जा सकता, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बढ़ने की एक वजह इन पहाड़ियों का गायब होना भी हो सकता है।

पीठ ने राजस्थान सरकार द्वारा पेश रिपोर्ट का जिक्र किया था और कहा था कि इससे संकेत मिलता है कि राज्य के अरावली क्षेत्र 115.34 हेक्टेयर इलाके में गैरकानूनी खनन की गतिविधियां चल रही हैं। पीठ ने CEC की रिपोर्ट का भी जिक्र किया जिसमें कहा गया कि भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा लिए गए 128 नमूनों में से 31 पहाड़ियां गायब हो गई हैं।

पीठ ने 48 घंटे के भीतर 115.34 हेक्टर क्षेत्र में गैरकानूनी खनन रोकने का आदेश देते हुए राज्य के मुख्य सचिव को इस आदेश पर अमल के बारे में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।