तमिलनाडु में बलात्कार और दोहरे हत्याकांड के दोषी की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई

तमिलनाडु में बलात्कार और दोहरे हत्याकांड के दोषी की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु में एक युवा लड़की से बलात्कार कर और फिर उसकी व उसके प्रेमी की हत्या करने के मामले में दोषी कुट्टावेल्लई उर्फ दिवाकर की मौत की सजा पर रोक लगा दी। साथ ही 22 अप्रैल को फांसी देने के लिए जारी डेथ वारंट को भी रद्द कर दिया गया।

'उचित प्रक्रिया' के पालन की कमी

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि इस मामले में कानून की उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

पीठ ने अपने संक्षिप्त आदेश में कहा कि 13.3.2019 के मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ द्वारा ट्रायल कोर्ट के आईपीसी की धारा 302 के तहत मौत की सजा की पुष्टि के फैसले पर रोक लगाई जाती है। इसके साथ ही 27.3.2019 को प्रिंसिपल सेशन जज, थेनी द्वारा मौत की सजा के लिए जारी वारंट को भी रद्द किया जा रहा है।

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को कानून में उपलब्ध उपायों को समाप्त करने के अवसर के बिना ये वारंट जारी किया गया है।

पीठ ने कहा, "आज की सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील द्वारा बताया गया है कि बाद के एक आदेश के जरिए ट्रायल कोर्ट ने जारी वारंट को वापस ले लिया है। जैसा कि पता चला है कि सजा के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करने की अवधि अभी बाकी है, हमारे विचार हैं कि मौत की सजा के लिए 27.3. 2019 को जारी वारंट, शबनम बनाम भारत संघ मामले में इस न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून के विपरीत है। "

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि "हम बिना कोई नोटिस जारी किए इस डेथ वारंट को रद्द करते हैं ताकि मौत की सजा के निष्पादन पर रोक लग सके और हम संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस याचिका को अनुमति देते हैं। हमें यह भी बताया गया है कि याचिकाकर्ता अपील दायर करने की प्रक्रिया में है। जैसे भी और जब दायर की जाएगी, न्यायालय का ध्यान आकर्षित करेगी।"

क्या था यह पूरा मामला१

दरअसल 14 मई, 2011 को थेनी जिले के सुरुली झरने में एक लड़की और उसका प्रेमी घूम रहे थे। याचिकाकर्ता दिवाकर ने लड़के पर बेरहमी से हमला किया और उसे मार डाला और फिर लड़की के साथ बलात्कार किया। बाद में उसकी भी हत्या कर दी गई।

दिवाकर ने मृतक लड़की के निजी अंगों को भी काट दिया। 5 दिन बाद दोनों शव बरामद हुए थे। मदुरै सीबी सीआईडी ने जांच शुरू कर दिवाकर को गिरफ्तार किया और थेनी में न्यायालय के समक्ष आरोप पत्र दायर किया जिसने वर्ष 2018 में उसे मौत की सजा दी। उच्च न्यायालय ने मौत की सजा की पुष्टि की और ट्रायल कोर्ट ने तुरंत 22 अप्रैल को उसकी फांसी के लिए डेथ वारंट जारी कर दिया। इस डेथ ल वारंट को रद्द करने के लिए वर्तमान रिट याचिका दायर की गई थी।