मेघालय खदान : सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खदान मालिक को नोटिस जारी किया, राज्य से मांगा अवैध खदानों का ब्योरा

मेघालय खदान : सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खदान मालिक को नोटिस जारी किया, राज्य से मांगा अवैध खदानों का ब्योरा

मेघालय के जयंतिया हिल्स जिले में अवैध कोयला खदान में फंसे मजदूरों को तुरंत बाहर निकालने की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खदान मालिक को नोटिस जारी कर उनकी ओर से जवाब मांगा है।

जस्टिस ए. के. सीकरी और जस्टिस एस. अब्दुल नज़ीर की पीठ ने मेघालय सरकार से राज्य में चल रही अवैध खानों का ब्योरा भी मांगा है।

पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील आनंद ग्रोवर की दलीलों पर बचाव कार्य को जारी रखने के लिए केंद्र और राज्य अधिकारियों को पंद्रह अन्य 100HP किर्लोस्कर की सेवाओं की आवश्यकता को देखने को कहा है।

इस मामले की पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया था कि मजदूरों को निकालने के प्रयास लगातार जारी हैं और राहत कार्य को बंद नहीं किया गया है।

केंद्र की ओर से SG तुषार मेहता ने जस्टिस ए. के. सीकरी की पीठ को बताया था कि हालांकि अभियान में दिक्कतें आ रही हैं और एक शव भी मिला है जो सड़ी- गली हालत में है। ऐसे में राहत अभियान में परेशानियां आ रही हैं।

वहीं मेघालय सरकार ने भी दावा किया कि अभी तक 1 करोड़ लीटर पानी खदान से बाहर निकाला जा चुका है और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। विभिन्न विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। सरकार ने इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल की है।

इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश आनंद ग्रोवर ने कहा कि खबर आई है कि नेवी ने राहत ऑपरेशन बंद कर दिया है। इस मामले में IIT के हाइड्रोलॉजिस्ट की मदद ली जानी चाहिए। पंपों को 24 घंटे चलाया जाना चाहिए और आसपास के गांवों से बिजली लेनी चाहिए।

इससे पहले 7 जनवरी को केंद्र की ओर से पेश SG तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि नेवी ने भी विशेष उपकरणों व विशेषज्ञ गोताखोरों की संख्या बढ़ाई है। इस वक्त NDRF, नेवी और ओडिसा फायर एंड रेस्क्यू सर्विस के जवानों समेत 200 से ज्यादा लोग राहत कार्य में जुटे हैं।

हालांकि इस दौरान याचिकाकर्ता ने कहा था कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शाम को 5 बजे राहत का काम बंद कर दिया जाता है।

इस दौरान केंद्र की ओर से पेश SG तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि दो मुख्य परेशानियों की वजह से राहत कार्य में दिक्कत आ रही है। पहली दिक्कत यह है कि नदी से पानी का रिसाव हो रहा है जिसे रोका नहीं जा पा रहा है। दूसरी दिक्कत यह है कि थाईलैंड और यहां के हालात बिल्कुल अलग हैं क्योंकि वहां गुफा का ब्लूप्रिंट मौजूद है, जबकि मेघालय में ये अवैध खदान है और इसका कोई ब्लूप्रिंट उपलब्ध नहीं है।

वहीं याचिकाकर्ता आदित्य एन. प्रसाद की ओर से कहा गया कि खदान से पानी निकालने के लिए केवल 25 हाई पावर पंप ही इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

दरअसल मेघालय के जयंतिया हिल्स जिले में अवैध कोयला खदान में फंसे मजदूरों को सकुशल बाहर निकालने के कदम उठाने के निर्देश जारी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में मांग की गई है कि देशभर में ऐसे मामलों से निपटने के लिए तय नियम प्रक्रिया बनाई जानी चाहिए और थाईलैंड की तर्ज पर राहत का काम होना चाहिए

गौरतलब है कि करीब 15 मजदूर, 13 दिसंबर को एक कोयला खदान में फंस गए थे। खदान में फंसे लोगों को बचाने के लिए एनडीआरएफ की टीमें मौके पर मौजूद हैं।