मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस :पटियाला जेल में मुख्य आरोपी को टार्चर करने के आरोप की अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस :पटियाला जेल में मुख्य आरोपी को टार्चर करने के आरोप की अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। सोमवार को न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने ब्रजेश के बच्चों की ओर से दाखिल उस अर्जी को खारिज कर दिया जिसमें पटियाला जेल में उसे टार्चर करने के आरोप लगाए गए थे।

सोमवार को पटियाला के अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पढ़ने के बाद पीठ ने कहा कि रिपोर्ट के मुताबिक ब्रजेश के शरीर पर टार्चर के कोई निशान नहीं मिले हैं। इससे पता चलता है कि जेल में उसका टार्चर नहीं हुआ।

पीठ ने ब्रजेश की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह के अनुरोध को भी ठुकरा दिया जिसमें शेल्टर होम की इमारत को ढहाने के फैसले में दखल देने को कहा गया था।

दरअसल मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर को पटियाला सेंट्रल जेल में मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए गए थे। इसे लेकर आरोपी के बच्चों ने सुप्रीम कोर्ट में

अर्जी दी और  इसके बाद छह दिसंबर को न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने आदेश जारी करते हुए पटियाला सेंट्रल जेल के अधीक्षक को ब्रजेश ठाकुर का गुरुवार को ही चार बजे राजिंद्र अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराने के निर्देश दिए। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को मेडिकल बोर्ड गठित कर मेडिकल परीक्षण करने और चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को खुद या किसी को नामित कर मेडिकल परीक्षण की निगरानी के निर्देश दिए। दरअसल वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने पीठ के समक्ष इस चिट्ठी का जिक्र किया जिसके बाद शाम को कोर्ट ने ये आदेश जारी किए।

इससे पहले 30 अक्तूबर को रेप केस के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर को बिहार से पंजाब की पटियाला जेल में ट्रांसफर करने के आदेश जारी किए थे। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट को देखने के बाद इसे चौंकाने वाला बताते हुए मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों ना निष्पक्ष जांच के लिए उसे बिहार से बाहर की जेल में ट्रांसफर कर दिया जाए ?

पीठ ने सीबीआई द्वारा सौंपी गई स्टेटस रिपोर्ट देखने पर कहा था कि इसमें जो जानकारी दी गई है वो डराने वाली हैं। शेल्टर होम में लड़कियों को बेहोशी की दवा देने के साथ-साथ उन्हें प्रताड़ित किया जाता रहा लेकिन ठाकुर के खौंफ के चलते आसपास के लोग भी चुप रहे। पीठ ने कहा था कि आखिर यह हो क्या रहा है ? सरकार क्या कर रही है ? इस मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर पर सीबीआई ने जो आरोप लगाए हैं, वो बेहद गंभीर हैं। पीठ ने ब्रजेश ठाकुर को नोटिस जारी करते हुए पूछा था कि क्यों ना उसे राज्य के बाहर दूसरी जेल में भेजा जाए। सीबीआई ने बताया था कि ब्रजेश ठाकुर जांच को प्रभावित  करने की कोशिश कर रहा है। बिहार सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने भी पीठ के सुझाव से सहमति जताई। हालांकि उन्होंने कहा कि राज्य में दो जेल ऐसी हैं जिनमें TADA के आरोपियों को भी रखा जा सकता है।