शराब पीकर पत्नी से नियमित झगड़ा करना क्रूरता है : बॉम्बे हाईकोर्ट ने पति को दिया संदेह का लाभ [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में आईपीसी की धारा 498-A और 306 के तहत दंडित व्यक्ति को संदेह का लाभ देते हुए उसे आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से बरी कर दिया। यह फ़ैसला 29, 2017 को दिया गया।

न्यायमूर्ति एएम बादर ने कहा कि अपने 17 साल के वैवाहिक जीवन में शराब पीकर पत्नी के साथ रोज़ाना झगड़ा क्रूरता हो सकती है क्योंकि इस तरह का आचरण कठोर है पर यह नहीं कहा जा सकता है कि इसने आत्महत्या के लिए उकसाया होगा।

पृष्ठभूमि

अभियोजन के अनुसार, मोहन केसाडे जिसकी 17 साल पहले शुशीला से शादी हुई थी, 16 अप्रैल 2015 को उसने आत्महत्या कर ली। जिस रात यह घटना हुई, केसाडे शराब पीकर घर लौटा और शुशीला से झगड़ा किया और कहा कि उसको शुशीला की ज़रूरत नहीं है। लगातार उत्पीड़न और लांछन के कारण शुशीला ने किरासन तेल डालकर आग लगा ली जिसे बुरी हालत में कोल्हापुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया।

प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद इस मामले की सुनवाई शुरू हुई। निचली अदालत ने केसाडे को पत्नी के साथ क्रूरता दिखाने के लिए पाँच साल की क़ैद की सज़ा सुनाई। बाद में उसने हाईकोर्ट में इस सज़ा के ख़िलाफ़ अपील की।

फ़ैसला

सुनवाई और गवाहों के बयानों पर ग़ौर करने के बाद कोर्ट ने केसाडे को संदेह का लाभ दिया। कोर्ट ने कहा कि यद्यपि केसाडे के सगे सम्बंधी उसके शराब पीकर झगड़ा करने और शुशीला के चरित्र पर उसको शक होने की बात कहते हैं पर स्वतंत्र गवाह रानी धनवाडे जो दोनों के जीवन में होने वाली घटनाओं को देखती रही हैं, का कहना था कि अपीलकर्ता को उसने शुशीला के चरित्र पर संदेह करने की बात करते हुए नहीं सुना है।

कोर्ट ने पत्नी के प्रति उसकी क्रूरता के लिए उसको मिली सज़ा को बरक़रार रखा पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से उसको बरी कर दिया।

 

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