दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा : ‘अनौपचारिक और लापरवाही’ से स्थिति रिपोर्ट दाख़िल करने से बचे [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा : ‘अनौपचारिक और लापरवाही’ से स्थिति रिपोर्ट दाख़िल करने से बचे [निर्णय पढ़ें]


दिल्ली हाईकोर्ट ने मयूर विहार थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर मनोज कुमार के ख़िलाफ़ अवमानना नोटिस को निरस्त कर दिया लेकिन दिल्ली पुलिस को चेतावनी दी कि वह अनौपचारिक और लापरवाही से स्थिति रिपोर्ट दाख़िल करने से बचे।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति संगीत ढींगरा सहगल की पीठ ने अपने आदेश में कहा, “…दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को अपने आचरण के उस उच्च स्तर पर खड़ा उतरना चाहिए जिसके आधार पर वे ख़ुद को परखे जाने की बात करते हैं…यह कोर्ट संबंधित एसएचओ और दिल्ली पुलिस के अन्य अधिकारियों को यह ताक़ीद करता है कि  वह कोर्ट के समक्ष लम्बित मामले में चल रही कार्यवाहियों में सावधानी बरतें…

… कोर्ट दिल्ली पुलिस को निर्देश देता है कि वह अनौपचारिक और लापरवाही से स्थिति रिपोर्ट दायर करने से बचे।”

कोर्ट एकल पीठ के जज द्वारा संदर्भित एक आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की सुनवाई कर रहा था। यह मामला एक महिला की अपील से सम्बद्ध है जिसने अपने ख़िलाफ़ फ़ेसबुक पर डाले गए आपत्तिजनक पोस्ट को हटाने की माँग की थी। इस मामले को देख रहे इन्स्पेक्टर ने इस बारे में कोर्ट में 27 अगस्त को झूठी स्थिति रिपोर्ट दाख़िल की थी जिसके बाद उसके ख़िलाफ़ अवमानना का नोटिस जारी किया गया था।

इस बारे में गड़बड़ी होने की बात का पता चलने के बाद कोर्ट ने इंस्पेक्टर से जवाब तलब किया। एकल जज ने कहा कि इंस्पेक्टर ने उनसे सूचनाएँ छिपाईं और उनके समक्ष ग़लत तथ्य रखे। इसके बाद उस इंस्पेक्टर के ख़िलाफ़ उन्होंने अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था।

खंडपीठ ने कहा कि यह कहा जा सकता है कि इंस्पेक्टर की रिपोर्ट की वजह से इस मामले की प्रक्रिया ग़लत दिशा में  गई पर उसने कहा कि ऐसा उसने जानबूझकर नहीं किया। कोर्ट ने यह भी कह कि इंस्पेक्टर ने पहले मौक़े पर ही कोर्ट से माफ़ी माँग ली थी।

इसलिए उसके ख़िलाफ़ अवमानना के नोटिस को निरस्त करने का आदेश कोर्ट ने किया पर संबंधित पुलिस अधिकारी को इस बारे में सतर्क और सावधान रहने को कहा।