उत्तराखंड हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पत्रकारों की स्थिति सुधारने को कहा [आर्डर पढ़े]

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पत्रकारों की स्थिति सुधारने को कहा [आर्डर पढ़े]

उत्तराखंड हाइकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पत्रकारों की समग्र स्थिति को ठीक करने के लिए विभिन्न क़दम उठाने को कहा है।कोर्ट ने उन्हें राज्य की आवासीय योजनाओं में आरक्षण देने को कहा है।

 न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की पीठ ने पत्रकारों की सेवा स्थिति में सुधार लाने के लिए कई तरह के निर्देश दिए। पीठ ने यह भी कहा कि पत्रकारों को केंद्र सरकार के 11 नवम्बर 2011 की अधिसूचना के अनुरूप वेतन नहीं दिया जा रहा है और वरिष्ठ पत्रकारों को जो पेंशन दिया जा रहा है वह भी काफ़ी कम होता है।

 पीठ रविंद्र देवलियाल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जो उन्होंने October 31, 2018 को दायर की थी। इस याचिका में उन्होंने नियमित और अनियमित संवाददाताओं को पेश आ रही मुश्किलों की चर्चा की है कि कैसे उन लोगों को कई समितियों की सिफ़ारिशों के बावजूद अपर्याप्त वेतन दिया जाता है।

याचिकाकर्ता ने प्रतिवादियों को इस बारे में उचित निर्देश जारी करने की माँग की है। पीठ ने अपने निर्देश में कहा है -




  1. प्रतिवादियों को निर्देश है की वे 11 नवम्बर 2011 को जारी अधिसूचना के अनुरूप उनकी सेवा स्थिति में सुधार लाएँ।

  2. प्रतिवादी राज्य को वरिष्ठ पत्रकारों को मिलने वाले पेंशन में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर परिवर्तन लाएँ और इसमें वृद्धि करें।

  3. उत्तराखंड सरकार पत्रकारों के लिए आंध्र प्रदेश, उड़ीसा आदि राज्यों की तरह कल्याणकारी कोष नियम बनाएँ।

  4. यह निर्देश भी दिया जाता है कि राज्य सरकार पेंशन और स्वास्थ्य योजना बनती है उसकी देखरेख अतिरिक्त मुख्य सचिव/सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशक करें और उत्तर प्रदेश की तरह ही इसके लिए आवश्यक कोष गठित की जाए।

  5. राज्य सरकार सरकारी आवास योजनाओं में पत्रकारों के लिए कुछ आरक्षण का प्रावधान कर सकती है।


 पीठ ने कहा कि यह राज्य सरकार का दायित्व है कि वह 2011 के नवम्बर में जारी अधिसूचना को लागू करे।

 सुनवाई के दौरान राज्य के स्थाई वक़ील परेश त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया कि पत्रकारों के कल्याण के लिए कई तरह की योजनाएँ शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि 5 करोड़ रुपए के एक कोष का गठन किया गया है। किसी भी तरह की विकलांगता की स्थिति में पत्रकारों को पाँच लाख रुपए की सहायता राशि दी जाती है। विशेष परिस्थिति में इसके तहत 10 लाख रुपए भी दिए जाते हैं। जिन पत्रकारों की उम्र 60 साल हो गई है उन्हें 5000 रुपए का वृद्धावस्था पेंशन भी दिया जाता है।

पत्रकारों की चिकित्सा सुविधा के लिए 25 लाख रुपए के कोष की व्यवस्था की गई है। सरकार इन्हें नक़द-रहित इलाज उपलब्ध कराने पर भी विचार कर रही है।

पर पीठ इन बातों से संतुष्ठ नहीं था। पीठ ने कहा लोकतंत्र के इस चौथे स्तम्भ को मज़बूत करने के लिए ज़रूरी है कि पत्रकारों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ बनाई जाएँ।