मामले को किसी अन्य अदालत को भेजने के बावजूद निचली अदालत ने दिया फैसला, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दिया जांच के आदेश [आर्डर पढ़े]

मामले को किसी अन्य अदालत को भेजने के बावजूद निचली अदालत ने दिया फैसला, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दिया जांच के आदेश [आर्डर पढ़े]

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने उस जज के खिलाफ जांच के आदेश दिये हैं जिसने मामले को किसी अन्य अदालत को भेजने के बाद भी इस मामले में आदेश जारी किया।

 न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी ने जांच को तीन महीने के भीतर समाप्त करने का आदेश दिया, जिसके बाद मामले के हस्तांतरण के उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने के दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू किए जाने की बात कही।

 अदालत ने 19 अगस्त, 2015 को पारित आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत दायर याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी), उज्जैन ने इस मामले में अपराधों को माफ कर दिया था।

 हालांकि, उच्च न्यायालय ने नोट किया कि 17 अगस्त, 2015 को, उसने इस मामले को जेएमएफसी, उज्जैन से जेएमएफसी,इंदौर की अदालत में तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित कर दिया था और संबंधित अदालत को एक सप्ताह के भीतर उसे रिकॉर्ड भेजने का निर्देश भी दिया था।

 मामले को स्थानांतरित करने के इस आदेश के बावजूद, 1 9 अगस्त को जेएमएफसी, उज्जैन ने अभियुक्तों को अपराध को खारिज करने के लिए आवेदन देने की अनुमति दी। यह न्यायमूर्ति महेश्वरी ने “अवैध, अधिकार के बाहर, गंभीर उल्लंघन और अज्ञानता” बताया।

 इसलिए अदालत ने धारा 482 के तहत अपनी शक्ति का उपयोग करने के लिए उपयुक्त मामला माना, और निचली अदालत द्वारा अपराध माफी के आदेश को निरस्त कर दिया। इसके बाद, कोर्ट ने जिला न्यायाधीश के माध्यम से इस मामले की जांच का निर्देश दिया, और कहा की वह न्यायाधीश समेत इस मामले से संबध्ध सभी लोगों का पक्ष सुनें।

 कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा की यह जांच तीन महीने में पूरी कर ली जाएगी और इसके बाद इसे हाईकोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा।

 यदि यह पाया जाता है कि किसी ने उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किया है, तो उच्च न्यायालय के समक्ष ऐसे लोगों के खिलाफ आपराधिक अवमानना के मामले के पंजीकरण का संदर्भ दिया जाना चाहिए और बेंच रजिस्ट्री द्वारा इसके विधिवत पंजीकरण के बाद उचित बेंच से समक्ष सुनवाई के लिए अधिसूचित की जानी चाहिए”।

 इस प्रकार इस याचिका का निपटान किया गया और नौ प्रतिवादियों को 10 हजार रुपए का हर्जाना चुकाने को कहा गया।  अदालत ने कहा की जेएमएफसी, उज्जैन इस मामले को तत्काल बहाल करे और इसे तुरंत जेएमएफसी, इंदौर के न्यायालय में स्थानांतरित करे। सभी पक्ष संभवतः जेएमएफसी, इंदौर की अदालत में 3 दिसंबर को पेश होंगे ऐसी उम्मीद है।