घर खरीदाने वाले घर विलंब से मिलने पर अनुबंध में निर्दिष्ट टोकन राशि से उच्च मुआवजे की मांग कर सकते हैं : एनसीडीआरसी [आर्डर पढ़े]

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने फैसला दिया है कि भवन निर्माता खरीदारों के साथ हुए समझौते के उस क्लॉज़ की आड़ नहीं ले सकते जिसमें कहा गया है कि अगर मकान सौंपने में विलंब हो रहा है तो विलंब की पूरी अवधि के लिए वे प्रति माह पाँच रुपए प्रति वर्ग फुट के हिसाब से मुआवजा देकर बच सकते हैं। आयोग ने कहा है कि खरीदार को मकान का कब्जा लेने के बाद ज्यादा मुआवजा मांगने का विकल्प है और वह चाहे तो चुकाई गई राशि को वापस करने की मांग भी कर सकता है।

 डॉ. एसएम कानितकर और दिनेश सिंह की खंडपीठ ने कहा, “देरी के लिए मुआवजे (5 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रति माह) एक अनुचित रूप से लंबे समय तक या अनिश्चित काल के लिए नहीं हो सकता है; सबसे अच्छा यह एक छोटी अवधि के लिए हो सकता है जो उचित प्रतीत होता है… यह कहना की मकान का कब्जा मिलने में अनिश्चित काल की या अनुचित रूप से देरी हो सकती है और देरी के लिए टोकन मुआवजे का अनिश्चित काल तक के लिए भुगतान किया जा सकता है या एक अनुचित रूप से लंबी अवधि के लिए तो यह गलत है। देरी के लिए टोकन मुआवजे के साथ अनिश्चित या अनुचित देरी बिना किसी सीमा के हमेशा के लिए जारी नहीं रह सकती है (ऐसी स्थिति बेतुकी होगी)”।

 एनसीडीआरसी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 19 के तहत एमएआर एमजीएफ द्वारा दायर अपील की सुनवाई कर रही थी, जिसमें राज्य आयोग, चंडीगढ़ द्वारा अगस्त में पारित आदेश को चुनौती दी गई थी।

 शिकायतकर्ता गोविंद पॉल ने सितंबर, 2011 में एम्मार के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत मकान का कब्जा 36महीने में सौंप दिया जाना था।

 लगभग 20 महीने की देरी के बाद, पॉल ने चंडीगढ़ के उपभोक्ता आयोग से अपने भुगतान की वापसी और देरी के लिए मुआवजे की मांग की। राज्य आयोग ने तिमाही आधार पर 15% ब्याज की दर से 38.9 लाख रुपये की मूल राशि की वापसी का आदेश दिया था। एम्मार को मुआवजे के रूप में 3 लाख रुपए का भुगतान करने को भी कहा गया। इसके अलावा निर्माता को मुकदमे पर होने वाले खर्च के हरजाने के रूप में पॉल को 25 हजार रुपए देने को कहा।

 अपील का निपटारा कराते हुए एनसीडीआरसी ने कहा कि समझौते द्वारा निर्धारित 5 रुपए प्रति वर्ग फीट के मुआवजे की दर से मकान का कब्जा मिलने तक मुआवजा देने की बात अनावश्यक रूप से लंबी समय तक के लिए नहीं हो सकता है।

 अदालत ने इसके बाद कहा कि इस मामले में देरी उचित या सामान्य नहीं कहा जा सकता है।

 इसके बाद कोर्ट ने मुआवजा को बढ़ाकर 5 लाख और मुकदमेबाजी पर लागत की राशि को बढ़ाकर 50 हजार रुपए कर दिया।एम्मार को चार हफ्तों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दर्ज करने का निर्देश दिया गया था, और अगर भुगतान तेजी से नहीं करने पर ज्यादा मुआवजा भरने की चेतावनी दी गई।

 

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