सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप के निदेशकों की पुलिस हिरासत 15 दिन बढ़ाई, नोएडा के होटल में रहेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने  आम्रपाली ग्रुप के CMD और दो निदेशकों की पुलिस हिरासत 15 दिनों के लिए बढ़ा दी है। हालांकि वो पुलिस स्टेशन या अपने घर नहीं बल्कि नोएडा के एक होटल में पुलिस निगरानी में रहेंगे।

जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने गुरुवार को ये आदेश जारी करते हुए कहा कि  अगले 15 दिन नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली के सातों परिसर सीलबंद रहेंगे। वो पुलिस की निगरानी में खुलेंगे और बंद होंगे। साथ ही सभी जगहों की निगरानी 24 घंटे पुलिस करेगी और पुलिस ही ऑडिट का काम कराएगी।

फोरेंसिक ऑडिट के दौरान तीनों निदेशक सुबह से रात तक उपस्थित रहेंगे। वहां आना जाना सीमित रहेगा और सबकी जानकारी रजिस्टर में दर्ज की जाएगी।इसके बाद बिहार के राजगीर व बक्सर का नम्बर आएगा।

घर पर रहने की अर्जी को ठुकराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीनों मोबाइल का इस्तेमाल तभी कर सकेंगे जब वो फोरेंसिक ऑडिटर्स की टीम के साथ होंगे और केवल उन लोगों से संपर्क करेंगे जिनकी ऑडिटर को जरूरत होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शाम को जब होटल से वापस आएंगे तो उनका मोबाइल ले लिया जायेगा।

 पीठ ने कहा कि इस सख्ती की वजह आपकी लापरवाही है क्योंकि हमारे बार बार चेतावनी देने के बावजूद  कोई सतर्कता नहीं दिखाई गई।

पीठ ने तीनों को औपचारिक तौर पर अवमानना का नोटिस जारी करते हुए कहा कि बार-बार आदेश के बावजूद निदेशकों ने इसका पालन नहीं किया जो अवमानना है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई को 20 नवंबर के लिए तय किया है।

वहीं ऑडिटर को आदेश दिया गया है कि वो दस हफ्ते में फोरेंसिक ऑडिट पूरा कर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करें।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक और बड़ा कदम उठाते हुए आम्रपाली ग्रुप के दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा के सात और बिहार के राजगीर व बक्सर के दो ऑफिसों को सील करने के आदेश दिए थे।

जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा था कि फोरेंसिक ऑडिट के लिए 46 कंपनियों के दस्तावेज जब्त करने के लिए पुलिस ये सीलिंग करेगी और चाबियां सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को सौंपी जाएंगी। इसके बाद फोरेंसिक ऑडिटर या उनके प्रतिनिधि ही इन जगहों पर जा पाएंगे।

साथ ही पीठ ने आदेश दिया था कि फिलहाल तीनों निदेशक पुलिस हिरासत में पुलिस स्टेशन में रहेंगे लेकिन उन्हें हवालात में नहीं रखा जाएगा। उनका पुलिस हिरासत बरकरार रखी जाए या नहीं इसके लिए गुरुवार को पीठ ने तीनों निदेशकों व ऑडिटर को तलब किया था।

अपने आदेश में पीठ ने कहा है कि तीनों निदेशक लिखित अंडरटेकिंग दें कि खाते संबंधी दस्तावेज इन 9 जगहों के अलावा कहीं ओर नहीं रखे जाएंगे। सील करने के बाद पुलिस अफसर इसकी जानकारी रजिस्ट्रार को देंगे।

गौरतलब है कि तीनों निदेशकों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा था कि उन्हें हवालात में रखने की बजाए हाउस अरेस्ट या किसी गेस्ट हाउस में रखा जाए।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए आम्रपाली ग्रुप के तीन निदेशकों को तब तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया था जब तक कि वो अपने खातों के दस्तावेज फोरेंसिक ऑडिट के लिए ऑडिटर को ना दे दें।

जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस यू यू ललित की पीठ ने 26 सितंबर के आदेश का पालन ना करने पर मुख्य प्रबंध निदेशक अनिल शर्मा, निदेशक शिवप्रिय और अजय कुमार को अवमानना नोटिस भी जारी कर दिए हैं।

सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अदालत ने 26 सितंबर को 24 घंटे के भीतर ये रिकॉर्ड ऑडिटर को देने के लिए कहा था लेकिन इन आदेशों का पालन नहीं किया गया। ये निदेशक अदालत के साथ हाईड एंड सीक खेल रहे हैं। ये कोर्ट की कार्रवाई का मखौल है।

पीठ ने कहा कि दस्तावेज देने में एक दिन लगे या फिर एक महीना, तीनों पुलिस हिरासत में ही रहेंगे।

 

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