दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, मालखानों में रखी है 8 लाख लीटर शराब

दिल्ली में यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को दिल्ली पुलिस की ओर से बताया गया कि पुलिस स्टेशनों के मालखानों में 8 लाख लीटर से अधिक शराब पड़ी है।

बुधवार को जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ के समक्ष पुलिस की ओर से बताया गया कि दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा भी दाखिल किया है।

इसके तहत 31 जुलाई  2018 थानों में 53043 वाहन रखे गए हैं और इनमें से 40243 वाहन जब्त किए गए हैं। इनमे से ज्यादातर वाहन मालिकों ने बीमा ले लिया है और बीमा कंपनियां अपने खर्च बचाने के लिए इन पर दावा नहीं कर रही हैं पुलिस ने कहा  कि यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए इन जब्त गाडियों के निपटारे के लिए उसने नीतियां तैयार की हैं और इस पर काम चल रहा है। वहीं ये भी बताया गया कि 31 अगस्त 2018 तक मालखानों में 8 लाख 2 हजार लीटर शराब रखी है।

दरअसल दिल्ली में ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए सडकों से अतिक्रमण हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के थानों में बेकार पडे वाहनों और मालखानों में जब्त ड्रग्स पर कहा था जितनी ड्रग्स की तस्करी खुले बाजार में होती है उससे कहीं ज्यादा पुलिस थानों के मालखानों से होती है। सैंकडो करोड़ की हेराइन मालखानों में रहती है और चार- पांच साल बाद जब केस कोर्ट में आता है तो बताया जाता है कि उसे चूहे खा गए। थानों में जब्त खड़े वाहनों में से 60 फीसदी तो चोरी के होते हैं। ऐसे में पुलिस को जब्त वाहनों को लेकर कोई नई पॉलिसी बनानी चाहिए। ऐसा हो सकता है कि दो- तीन महीने तक कोई मालिक वाहन लेने ना आए तो उसे बेच दिया जाए। अगर अगले दो- तीन साल के बीच कोई दावा करता है तो वो रुपये उसे दे दिए जाएं। इस पॉलिसी से मालखानों में जगह भी बचेगी और भ्रष्टाचार भी कम होगा। सरकार की ओर से कहा गया था कि वर्षों बाद जब मुकदमा निपटता है तो वाहन की दशा ऐसी हो जाती है मालिक उसे ले जाने को तैयार नहीं होता।कोर्ट ने कहा था कि अभी दिल्ली की जिला अदालतों में एक ही नाज़िर यानी कोर्ट के मालखाने का इंचार्ज है। लिहाज़ा उस पर काम का बोझ ज़्यादा होता है। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि और नाज़िर की नियुक्ति की जानी चाहिए। पीठ ने इस सिलसिले में दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक को तलब भी किया था।

Got Something To Say:

Your email address will not be published. Required fields are marked *


*