सुप्रीम कोर्ट ने कठुआ केस की फिर से जांच कराने के आदेश देने से इनकार किया, आरोपियों से कहा ट्रायल में उठाएं मुद्दे

सुप्रीम कोर्ट ने कठुआ केस की फिर से जांच कराने के आदेश देने से इनकार किया, आरोपियों से कहा ट्रायल में उठाएं मुद्दे

जम्मू-कश्मीर में कठुआ में आठ वर्षीया बच्ची के अपहरण, सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले की सुप्रीम कोर्ट ने फिर से सीबीआई या निष्पक्ष जांच कराने से इनकार कर दिया है।

जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने शुक्रवार को आरोपी संजी लाल, उसके बेटे विशाल और एक अन्य नाबालिग आरोपी की याचिका खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि इस मामले में जितने भी सवाल उठाए गए हैं, उन्हें बचाव पक्ष ट्रायल में उठा सकता है।

सुनवाई के दौरान संजी लाल और विशाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने दोबारा जांच की दलील दी तो पीठ ने कहा कि इस मामले में दोबारा जांच की जरूरत नहीं है।

वहीं अन्य आरोपी की ओर से पेश अंकुर शर्मा ने कहा कि मामले की जांच सही नहीं हुई। दस दिनों मे तीन बार  SIT बनाई गईं।जांच में शामिल दो अफसरों पर रेप और कस्टडी में मौत व करप्शन का केस हैं। इसलिए मामले की फिर से जांच होनी चाहिए। तब तक ट्रायल पर रोक लगे। लेकिन पीठ ने कहा कि तथ्य देखने के बाद हमें लगता है कि मामले की फिर से जांच की जरूरत नहीं है।

दरअसल इस मामले में 30 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान की कार्रवाई बंद कर दी थी और कहा था कि वो ट्रायल की निगरानी नहीं करेगा। मई में कोर्ट ने  मामले के ट्रायल को कठुआ से 30 किलोमीटर दूर पंजाब के पठानकोट जिले में ट्रांसफर कर दिया था।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की विशेष बेंच ​​ने जम्मू-कश्मीर के पीड़ित के परिवार, जम्मू-कश्मीर सरकार और आरोपी लोगों से सर्वसम्मति से मामले को स्थानांतरित कर दिया था।

दिशानिर्देशों की एक श्रृंखला जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि ट्रायल इन कैमरा होना चाहिए। पठानकोट जिला न्यायाधीश मुकदमे का संचालन करें और इसे किसी अन्य अदालत में न दें। यह मुकदमा रणबीर दंड संहिता के प्रावधानों के तहत चलाया  जाएगा। जम्मू-कश्मीर सरकार ट्रायल के लिए दुभाषिया प्रदान करेगी। दस्तावेजों का अनुवाद उर्दू से अंग्रेजी में किया जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर सरकार को एक विशेष सरकारी अभियोजक नियुक्त करने की अनुमति दी और ट्रायल के दौरान पीड़ितों, वकीलों और आरोपी को सुरक्षा, परिवहन और अन्य सभी सहायक सुविधाएं प्रदान करने को कहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि आरोपियों को कठुआ जेल से गुरदासपुर जेल ट्रांसफर किया जाए क्योंकि ट्रायल के दौरान लाने ले जाने में वक्त लगता है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया था और कहा था कि इसके बाद किसी को कोई दिक्कत है तो पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट जा सकते हैं।