सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत से कुछ शर्तों के साथ आधार को वैध करार दिया [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत से कुछ शर्तों के साथ आधार को वैध करार दिया [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ में 4:1 के बहुमत से आधार को वैध करार दे दिया।

बुधवार को करीब डेढ़ घंटे तक सुनाए गए इस फैसले में जस्टिस ए के सीकरी ने अपनी चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस ए एम खानविलकर की ओर से फैसला सुनाया जबकि कुछ अन्य विचारों के साथ जस्टिस अशोक भूषण ने भी आधार को वैध ठहराया। हालाकि आधार एक्ट की कुछ धाराओं को रद्द कर दिया गया।

वहीं  जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इससे असहमति जताते हुए सरकार पर आधार को मनी बिल के तौर पर पास करने को भी निशाना साधा और इसे सीधे- सीधे असंवैधानिक करार दे दिया।

जस्टिस सीकरी ने बहुमत का फैसला सुनाते हुए कहा कि आधार से समाज के हाशिए वाले वर्ग को ताकत मिलती है। ये फैसला बड़े राष्ट्रीय हित में तालमेल बनाने पर आधारित है।

बहुमत के फैसले में धारा 57 को जिसमें प्राइवेट कंपनियों के आधार मांगने की अनिवार्यता को रद्द कर दिया गया। पीठ ने स्कूल में दाखिले के लिए आधार की अनिवार्यता को भी रद्द किया। साथ ही बैंक अकाउंट के लिए भी आधार की अनिवार्यता को रद्द किया गया है। हालांकि आयकर अधिनियम की धारा 139 AA के तहत

आधार को PAN से लिंक किए जाने को बरकरार रखा गया है। कल्याणकारी योजनाओं के लिए भी आधार जरूरी रहेगा लेकिन सरकार किसी जरूरतमंद को वंचित नहीं रख सकती।

पीठ ने कहा कि सरकार कोई मेटा डेटा नहीं रख सकती और डेटा को पांच साल तक नहीं बल्कि 6 महीने तक ही रखा जा सकेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में किसी का डेटा शेयर करने के लिए सेकेट्री स्तर का अधिकार और कोई रिटायर्ड जज ही अनुमति देगा। ये भी कहा गया कि आधार को मनी बिल के तौर पर पास किया जा सकता है।

वहीं जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इस फैसले से असहमति जताते हुए आधार को असंवैधानिक करार दे दिया। उन्होंने कहा कि आधार को मनी बिल के तौर पर पास करना अवैध था। आधार को किसी भी योजना में अनिवार्य करना अंसवैधानिक है। कुछ लाभ के लिए किसी के मौलिक अधिकारों से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। प्राइवेट कंपनियों को दिया गया डेटा तुरंत डिलीट किया जाना चाहिए। वहीं पांचवे जज जस्टिस भूषण ने तीन अन्य जजों से सहमति जताई और कहा कि आधार असंवैधानिक नहीं है।

दरअसल आधार को चुनौती देने वाली 31 याचिकाओं पर 10 मई को सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ में सुनवाई पूरी हुई और संविधान पीठ ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

पांच जजों का संविधान पीठ तय करना था  कि आधार निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट में  38 सुनवाई हुई।

सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए के सीकरी, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस अशोक भूषण की संविधान पीठ ने की थी ।

 आधार पर फैसला आने तक सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के अलावा बाकी सभी केंद्र व राज्य सरकारों की योजनाओं में आधार की अनिवार्यता पर रोक लगाई गई थी। इनमें मोबाइल सिम व बैंक खाते भी शामिल हैं। AG के के वेणुगोपाल ने कोर्ट में कहा कि ये सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में दूसरी सबसे बडी सुनवाई है इससे पहले 1973 में मौलिक अधिकारों को लेकर केशवानंद भारती केस की सुनवाई करीब पांच महीने चली थी।