कुष्ठ रोगियों के कल्याण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए दिशानिर्देश [निर्णय पढ़ें]

कुष्ठ रोगियों के कल्याण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए दिशानिर्देश [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कुष्ठ रोगियों के इलाज और उनके पुनर्वास के लिए कई तरह के दिशानिर्देश जारी किये  ताकि इस रोग से ग्रस्त लोगों और उनके परिवार के सदस्यों के साथ होने वाले भेदभाव समाप्त किये जा सकें।

ये निर्देश मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने ने जारी किये।

इस मामले को लेकर याचिका पंकज सिन्हा ने दायर की थी। याचिका में कोर्ट से मांग की गई थी कि वह केंद्र और राज्यों को नए कुष्ठ रोगियों का पता लगाने के लिए समय समय पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण कराने का निर्देश दे। इसके अलावा कोर्ट से यह भी आग्रह किया गया था कि वह कुष्ठ रोग पर 2010-11 में किये गए राष्ट्रीय नमूना संग्रह को सार्वजनिक करने का आदेश जारी करे।

इस याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश जारी किया -




  1. केंद्र और राज्य सरकारें समय -समय पर कुष्ठ रोग और इसके रोगियों के बारे में सर्वेक्षण करेंगी ताकि नए रोगों के बारे में पता किया जा सके। 2010-11 में किये गए राष्ट्रीय नमूना संग्रह सार्वजनिक किये जाएंगे। राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण योजना (एनएलईपी) की गतिविधियों का पूरा प्रचार किया जाए।

  2. अंतर्राष्ट्रीय कुष्ठ दिवस पर इसके बारे में जोर-शोर से प्रचार किया जाए और लोगों को सरकारी अस्पतालों में इस रोग की मुफ्त चिकित्सा की उपलब्धता के बारे में बताया जाए।

  3. राज्य सरकारें और केंद्र यह सुनिश्चित करे कि कुष्ठ की दवाएं मुफ्त में इसके रोगियों को उपलब्ध हो और इनकी कमी नहीं हो।

  4. सरकारी और निजी अस्पतालों में कुष्ठ रोगियों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं हो और इनके लिए इलाज को आम स्वास्थ्य सेवा में शामिल किया जाए और जनरल वार्ड और ओपीडी सेवाओं में इनको अलग नहीं किया जाए। इस बात का विशेष ख़याल रखा जाए की महिला कुष्ठ रोगियों के साथ कोई भेदभाव नहीं हो।

  5. जिन कुष्ठ रोगियों को आंशिक विकृति का शिकार होना पड़ा है अगर शल्य चिकित्सा से यह ठीक हो सकता है तो उन्हें इसकी सलाह दी जानी चाहिए और इसके लिए पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

  6. स्कूलों में कुष्ठ रोग के बारे में बताया जाना चाहिए ताकि लोगों को इस बीमारी के बारे में सही जानकारी मिल सके।

  7. केंद्र और राज्य सरकार को अवश्य ही यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कुष्ठपीड़ित परिवार से आने वाले छात्रों के साथ स्कूल में कोई भेदभाव नहीं हो। ऐसे छात्रों को स्कूल में प्रवेश से मना नहीं की जानी चाहिए और उन्हें मुफ्त शिक्षा दिए जाने की कोशिश होनी चाहिए।

  8. कुष्ठपीड़ित व्यक्ति को बीपीएल कार्ड देना सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि वह विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सके।

  9. केंद्र राज्य सरकारें सभी कुष्ठ रोगियों को मुफ्त एमसीआर जूते उपलब्ध कराएंगी।

  10. केंद्र और राज्यस सरकारें मिलकर इस तरह की योजना बनाएंगी ताकि कुष्ठ रोगियों को उनके पुनर्वास के लिए हर माह न्यूनतम मदद उपलब्ध कराई जा सके।

  11. केंद्र और राज्य सरकारें कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास के लिए व्यापक योजना बनाए ताकि उन्हें व उनके परिवार के सदस्यों को हर तरह की मौलिक सुविधाएं दी जा सके। उद्देश्य इस बीमारी के साथ जुड़े कलंक को मिटाना है।

  12. कुष्ठ रोगियों में विकलांगता के आंकलन के लिए केंद्र सरकार को एक अलग क़ानून लाने पर विचार करना चाहिए ताकि इस तरह के व्यक्ति को विकलांगता प्रमाणपत्र जारी किया जा सके।