हाईकोर्ट जज के रूप में नियुक्ति की सूची में काफी संख्या में जजों के नाम शामिल – सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से इस मामले पर गौर करने को कहा

हमें बताया गया है कि हाईकोर्ट में नियुक्ति पाने वाले जजों के नामों के सूची काफी लम्बी है। हम अटॉर्नी जनरल से आग्रह करेंगे कि वे इस पर गौर करें और जितना जल्दी हो सके इस पर आवश्यक कार्रवाई करें,” सोमवार को यह कहना था सुप्रीम कोर्ट के एक पीठ का।

न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की पीठ कलकत्ता हाईकोर्ट के बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव के खिलाफ अवमानना की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कलकाता हाईकोर्ट के वकीलों के काम-रोको प्रस्ताव पर गौर करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव को अदालत में तलब किया था जिन्होंने हड़ताल का आह्वान किया था।

बार एसोसिएशन के अधिकारयों के इसे उचित ठहराने की दलील पर पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट में जजों की संख्या बहुत कम है इसका हवाला देते हुए भी हड़ताल करना पूर्व कप्तान हरीश उप्पल बनाम भारत संघ मामले में दिए फैसले के खिलाफ है।

पीठ ने इस बारे में प्रस्तुत क्षमा याचना को स्वीकार किया पर कहा, “क्षमा याचना को स्वीकार करने के बावजूद जो हुआ है उसको हम नजरअंदाज नहीं कर सकते और बार इस बात का ख़याल रखेगा कि ऐसा फिर न हो।”

पीठ ने कहा, “जब भी इस तरह की संकट की स्थिति पैदा होती है, जजों की तदर्थ नियुक्ति पर गंभीरता से विचार की जानी चाहिए ताकि अंततः न्याय दिलाने की प्रक्रिया में मुकदमादारों को तकलीफ न हो।”

कोर्ट ने इस बारे में अवमानना की प्रक्रिया को बंद कर दिया।

मध्य प्रदेश में हड़ताल

इस वर्ष अप्रैल में, मध्य प्रदेश में भी वकीलों ने हड़ताल का आह्वान किया था और इसके लिए जो कारण बताए गए थे उसमें हाईकोर्ट में जजों की संख्या का कम होना भी एक था। एक वकील द्वारा दायर रिट याचिका में हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायिक कार्य से अनुपस्थित रहने का आह्वान करना वकीलों के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। हाल ही में, हाईकोर्ट ने राज्य के बार काउंसिल और बार एसोसिएशन द्वारा हड़ताल के आह्वान के खिलाफ निर्देश जारी किया और इन संस्थाओं के सदस्यों को कोर्ट में पेश होने पर कुछ समय के लिए रोक लगा दिया।

 

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