कर्नाटक हाईकोर्ट ने निचली अदालत से मौत की सजा पाए ऑटोरिक्शा चालक को बरी किया [निर्णय पढ़ें]

अगर धारा 25 कहती है कि किसी पुलिस वाले के समक्ष कबूले गए अपराध को किसी अपराधी के खिलाफ साबित नहीं किया जा सकता, फिर धारा 26 किसी के भी समक्ष कबूले गए जुर्म के बारे में  सबूत पेश करने पर पाबंदी लगाता है बशर्ते कि इस तरह का बयान देने के समय आरोपी पुलिस हिरासत में है और इस मामले में एक ही अपवाद है मजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया उसका बयान.”

कर्नाटक हाईकोर्ट ने निचली अदालत से मौत की सजा पाए एक ऑटोरिक्शा चालक को बरी कर दिया।

ऑटोरिक्शा चालक को एक अधेड़ उम्र की महिला के साथ बलात्कार करने और फिर उसकी हत्या कर देने का आरोप था। सत्र अदालत ने उसे मौत की सजा मुख्यतः इस आधार पर दी कि उसके पास उस महिला के गहने मिले थे जिसकी हत्या हुई थी। इसके अलावा इस अपराध के बारे में उसके इकबालिया बयानों के आधार पर उसको सजा दी गई। उसको बलात्कार के आरोपों से भी बरी कर दिया गया।

ऑटोरिक्शा चालक को मौत की सजा सुनाने के बारे में सत्र अदालत ने कहा कि आरोपी ने कम समय में ही तीन महिलाओं की हत्या की और वह समाज में महिलाओं के लिए ख़तरा है। “वह एक ऑटोरिक्शा चालक भी है। एक ड्राईवर और सवारी के बीच विश्वास का रिश्ता होता है और विशेषकर जब एक महिला जब किसी ऑटोरिक्शा में चलती है और अगर इस स्थिति का लाभ उठाया जाता है तो फिर इसको माफ़ नहीं किया जा सकता, ” कोर्ट ने कहा।

ऑटोरिक्शा चालक की अपील पर न्यायमूर्ति रवि मलिमथ और न्यायमूर्ति श्रीनिवास हरीश कुमार ने कहा कि इस बात के स्वतंत्र सबूत के अभाव में कि कथित गहने मृत महिला के थे, इस गहने की बरामदगी को सबूत नहीं माना जा सकता।

पीठ ने कहा कि “अगर धारा 25 कहती है कि किसी पुलिस वाले के समक्ष कबूले गए अपराध को किसी अपराधी के खिलाफ साबित नहीं किया जा सकता, फिर धारा 26 किसी के भी समक्ष कबूले गए जुर्म के बारे में  सबूत पेश करने पर पाबंदी लगाता है बशर्ते कि इस तरह का बयान देने के समय आरोपी पुलिस हिरासत में है और इस मामले में एक ही अपवाद है मजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया उसका बयान।”

आरोपी को बरी करते हुए कोर्ट ने कहा, “यद्यपि गहने प्रथम आरोपी के पास से मिले पर इस बाते के सबूत नहीं हैं कि ये गहने उसी महिला के हैं। इस बारे में अभी बहुत कुछ ज्ञात नहीं है।”

 

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