भविष्य में क़ानून के अनुरूप तर्कसंगत आदेश पास करें : उड़ीसा हाईकोर्ट को सुप्रीम कोर्ट की सलाह [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कर्मचारी मुआवजा-सह-सहायक श्रम आयुक्त के आदेश में अकारण हस्तक्षेप करने के लिए उड़ीसा हाईकोर्ट की आलोचना की और कहा कि वे बिना किसी कारण के फैसला न दें.

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित ने कहा, “हाईकोर्ट का यह दृष्टिकोण अप्रत्याशित है. हाईकोर्ट से यह उम्मीद की जाती है कि वह विशुद्ध रूप से क़ानून के अनुरूप मामलों पर गौर करेगा.

यह आश्चर्य की बात है कि हाईकोर्ट ने आयुक्त के उचित निर्णय में हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं बताया. हाईकोर्ट के इस कदम की प्रशंसा नहीं की जा सकती.”

कोर्ट आयुक्त द्वारा 2015 में दिए गए मुआवजा के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रहा था. इस आदेश को संशोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को इस तरह का आदेश भविष्य में नहीं देने की चेतावनी दी.

इस आदेश और हाईकोर्ट के व्यवहार पर अपनी असहमति दर्ज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम हाईकोर्ट से आग्रह करते हैं कि वह भविष्य में तर्कों पर आधारित और क़ानून के अनुरूप ही कोई फैसला दे और इस तरह का आदेश न दे.

यह स्पष्ट किया जाता है कि उचित आदेश देना कोर्ट का कर्तव्य है और कोर्ट से यह उम्मीद नहीं की जाती है कि वह उनसे वह भी उनसे छीन ले जो कि न्यायपूर्ण हैं. इस तरह हाईकोर्ट के फैसले को कहीं से सही नहीं कहा जा सकता है.”

 

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