बिजनेस वीसा पर कौन सी गतिविधियों की अनुमति है, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से सूची देने को कहा; अमरीकी महिला ने खुद को काली सूची में रखे जाने को दी चुनौती [आर्डर पढ़े]

बिजनेस वीसा पर भारत आने वाले लोग किस तरह की गतिविधियों में भाग ले सकते हैं इस बारे में दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से  सूची सौंपने को कहा।

अमरीकी व्यवसायी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र से यह सूची सौंपने की बात कही। इस व्यवसायी को काली सूची में डाल दिया गया था और उसके भारत प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी। महिला ने यह जानना चाहा है कि उसने कैसे नियमों का उल्लंघन किया है।

एक अमरीकी महिला काशा एलिज़ाबेथ वेंडे ने याचिका दायर कर 12 मार्च को दिए गए आदेश में संशोधन की मांग की है क्योंकि उसको काली सूची में डालने के केंद्र की दलील से वह संतुष्ट नहीं है।

48-वर्षीया काशा को 5 जनवरी को चेन्नई हवाई अड्डे पर रोक लिया गया था और वापस अमेरिका भेज दिया गया और बाद में काली सूची में डाल दिया गया।

काशा ने कहा कि उसने 2004 से भारत में रहते हुए कभी भी वीसा नियमों का उल्लंघन नहीं किया पर उसे भारत से वापस भेज दिया गया और बाद में उसका पक्ष सुने बिना और बिना स्पष्ट कारण बताए काली सूची में डाल दिया गया।

काशा के वकील शोउमेंदु मुखर्जी और राघव अवस्थी ने कहा कि काशा ने पहली बार 9 मार्च को कोर्ट में इस मामले को चुनौती दी थी और याचिका पर फैसला होने तक उसे भारत में प्रवेश देने की मांग की थी।

“याचिकाकर्ता ऐसा इसलिए चाहती है क्योंकि वह “पोंडीफोटो” नामक फोटो प्रदर्शनी का आयोजक है जो कि इस साल पुदुचेरी में आयोजित होनी है। यह फोटो प्रदर्शनी पूरी दुनिया में काफी लोकप्रिय है और इसमें कई कलाकार हिस्सा लेते हैं, बड़े प्रायोजक पैसे लगाते हैं और पुदुचेरी की सरकार भी हिस्सेदारी करती है जिससे पुदुचेरी में पर्यटन और वहाँ की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।

एकल जज ने 12 मार्च को अंतरिम राहत के आवेदन पर नोटिस जारी किया पर उसको कोई राहत नहीं दिया। इसके बाद काशा ने आगे अपील की। 2 मई को खंडपीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि पांच दिन के भीतर वह काशा को काली सूची में डालने के बारे में कारणों की प्रति पेश करे।

“पर याचिकाकर्ता को एक पृष्ठ का एक दस्तावेज दिया गया जिसमें शायद ही कोई ब्योरा था जिसकी जानकारी याचिकाकर्ता को नहीं थी। खंडपीठ ने एलपीए को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को 12 मार्च 2018 को दिए गए आदेश में संशोधन की मांग कर सकती है अगर वह इससे संतुष्ट नहीं है। मुखर्जी ने कहा कि उसका नया आवेदन उसको मिली इसी राहत का हिस्सा है।”

अब इस मामले पर 22 मई को सुनवाई होगी।

 

Got Something To Say:

Your email address will not be published. Required fields are marked *


*