कम हाजिरी होने के कारण परीक्षा में बैठने से रोक दिए गए क़ानून के छात्रों को दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत [आर्डर पढ़े]

छात्रों ने कहा, हड़ताल के कारण उनकी हाजिरी पूरी नहीं हुई

दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ फैकल्टी के छात्रों को अंतरिम राहत देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया कि छात्रों को परीक्षा में बैठने दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि पर यह अंतरिम आदेश है और इसका निर्णय याचिका पर अंतिम फैसले पर निर्भर होगा। छात्रों को परीक्षा में बैठने के लिए 70 फीसदी हाजिरी नहीं होने के कारण बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के नियमानुसार दिल्ली विश्वविद्यालय ने उन्हें परीक्षा में बैठने से रोक दिया था।

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने लॉ फैकल्टी के पांच छात्रों को यह राहत दी जिनको अलग अलग सेमेस्टर की परीक्षाओं में बैठना था पर उनकी हाजिरी पर्याप्त नहीं थी।

छात्रों ने अलग अलग दाखिल याचिकाओं में 7, 8 और यहाँ तक कि 10 मई को लॉ फैकल्टी द्वारा जारी सूचना को चुनौती दी। इन सूचनाओं के माध्यम से चौथे और छठे सेमेस्टर के छात्रों को 70 फीसदी हाजिरी नहीं होने के कारण परीक्षा में बैठने से रोक दिया था।

न्यायमूर्ति पल्ली ने इन पांच छात्रों को अंतरिम राहत दी जिनमें से चार को लॉ सेंटर II और एक को लॉ सेंटर I में परीक्षा देनी थी। ये सभी परीक्षाएं पहले ही शुरू हो चुकी थी। इन छात्रों के नाम हैं हर्ष कादयान, अभिषेक कादयान, सेवल प्रीत सिंह, विशाल ठाकुर एवं हरमनदीप सिंह।

इससे पहले न्यायमूर्ति पल्ली ने एक अन्य छात्र आदर्श राज को इसी तरह के मामले में अंतरिम राहत दी थी। आदर्श राज ने हाजिरी की गणना करने के तरीके पर सवाल उठाया और कहा कि सब जानते हैं कि फरवरी 2018 में लॉ सेंटर-I में 15 दिनों तक हड़ताल थे, प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं दी है। हड़ताल के कारण इच्छा होने के बावजूद वह क्लास अटेंड नहीं कर पाया।

“… यह कि हड़ताल की अवधि में क्लास नहीं हुए इस बात का सत्यापन तो इस बारे में रिकॉर्ड पेश किये जाने के बाद ही निर्धारित हो पाएगा…यह निर्धारित करना होगा कि उक्त अवधि के दौरान जो क्लास नहीं हुए उसके कारण छात्र के साथ कोई पक्षपात हुआ या नहीं क्योंकि छात्र के वकील का कहना है कि जब क्लास नहीं चल रहे थे, छात्र क्लास अटेंड करना चाहता था।”

याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति पल्ली ने कहा, “मैंने याचिकाकर्ता के वकील की दलील सुनी है और छात्र (आदर्श राज) को 10 मई के आदेश से मिली राहत याचिकाकर्ताओं को भी नहीं मिलने का कोई कारण नहीं दिखता। इसके अनुरूप, याचिकाकर्ताओं को एलएलबी के उनके सेमेस्टर परीक्षा में बैठने की इजाजत दी जाती है पर यह उनकी याचिका पर अंतिम निर्णय आने पर निर्भर करेगा।”

 

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