क़ानून के अतिरिक्त वृहत प्रश्न दूसरी अपील पर सुनवाई के दौरान ही उठाए जा सकते हैं, फैसले में नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

क़ानून के अतिरिक्त वृहत प्रश्न दूसरी अपील पर सुनवाई के दौरान ही उठाए जा सकते हैं, फैसले में नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

पहला तो यह कि इस तरह के प्रश्न अपील में ही उठने चाहिएं, दूसरा, अतिरिक्त प्रश्न तैयार करने के लिए कारण बताए जाएं तीसरा, इस तरह के प्रश्न अपील पर सुनवाई के दौरान ही बनाए जाएं, पीठ ने कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने विजय अर्जुन भगत बनाम नाना लक्ष्मण तपकिरे मामले में हाई कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि हाईकोर्ट को चाहिए कि वह क़ानून के अतिरिक्त बड़े प्रश्न दूसरी अपील पर सुनवाई के दौरान ही उठाए, फैसले में नहीं।

इस मामले में हाईकोर्ट ने दो अतिरिक्त प्रश्नों पर अपील की अनुमति दी थी जो कि फैसले में उठाए गए थे न कि दूसरी अपील को स्वीकार करने के दौरान।

न्यायमूर्ति एएम सप्रे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर ने कहा कि यद्यपि हाईकोर्ट ने अपील को स्वीकार करने के समय छह बड़े प्रश्न उठाकर सही किया पर इन प्रश्नों का उत्तर नहीं देकर उसने गलती की और इसके बदले दो अतिरिक्त प्रश्नों पर अपील की अनुमति दे दी जिन्हें फैसले में उठाए गए थे।

कोर्ट ने कहा कि दूसरी अपील में हाईकोर्ट सिर्फ छह प्रश्न उठा सकता है इससे ज्यादा नहीं। पीठ ने कहा कि यद्यपि उसको प्रश्न उठाने का अधिकार है पर यह तीन शर्तों से बंधा है - पहला तो यह कि इस तरह के प्रश्न अपील में ही उठने चाहिएं, दूसरा, अतिरिक्त प्रश्न तैयार करने के लिए कारण बताए जाएं तीसरा, इस तरह के प्रश्न अपील पर सुनवाई के दौरान ही उठाए जाएं।

 नागरिक प्रक्रिया संहिता की धारा 100 की चर्चा करते हुए कोर्ट ने कहा, “...हाईकोर्ट इस तरह के अधिकार का प्रयोग तभी कर सकता है जब वह अपील की सुनवाई के दौरान ही इन प्रश्नों को उठाए जाने का कारण बताता है।”

पीठ ने इस मामले को हाईकोर्ट को लौटाते हुए कहा, “दूसरी अपील पर निर्णय के दौरान हाईकोर्ट ने जो प्रक्रिया अपनाई उससे पक्षकारों के अधिकारों के प्रति दुर्भावना का भाव तैयार हुआ क्योंकि पक्षकार, विशेषकर अपीलकर्ता जिन पर इस आदेश का प्रतिकूल असर पड़ा, उन्हें दो अतिरिक्त प्रश्न उठाए जाने के बारे में जानकारी नहीं थी और इन दो प्रश्नों पर वे कोर्ट में अपना पक्ष नहीं पेश कर पाए जिस पर यह आदेश आधारित है।”