अमरनाथ गुफा को ‘साइलेंस जोन’ घोषित करने वाले NGT के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) के 13 दिसंबर 2017 के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें अमरनाथ गुफा में शिवलिंग के सामने ‘साइलेंस जोन’ घोषित कर दिया गया था। एनजीटी के इस आदेश को अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने श्राइन बोर्ड की याचिका को स्वीकार करते हुए एनजीटी के आदेश को रद्द किया। पीठ ने माना कि एनजीटी ने अपने अधिकारक्षेत्र से बाहर जाकर ये फैसला जारी किया था।

 बोर्ड ने एनजीटी के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी थी कि ट्रिब्यूनल ने स्वत: यह आदेश पारित किया था जबकि याचिकाकर्ता  ने यह मसला उठाया तक नहीं था। बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पीठ के सामने कहा कि एनजीटी के सामने प्रार्थना जम्मू केवैष्णो देवी मंदिर परिसर में घोड़े और खच्चरों पर प्रतिबंध लगाने तक सीमित थी लेकिन एनजीटी ने स्वत: ही अमरनाथ मामले पर संज्ञान लेकर आदेश पारित कर दिया। रोहतगी ने कहा कि एनजीटी ने गुफा में शिवलिंग के सामने घंटी बजाने, प्रसाद चढ़ाने और जयकारे लगाने पर रोक लगा दी थी। इस पर पीठ ने सवाल किया कि आखिर एनजीटी क्या कहना चाहती है? जबाब में रोहतगी ने कहा कि आखिर श्रद्धालुओं को प्रसाद न ले जाने के लिए कैसे कहा जा सकता है ? इससे लोगों की धार्मिक संवेदनाएं जुड़ी हुई हैं। इस पर पीठ ने यह सुझाव दिया कि बोर्ड द्वारा प्रसाद मुहैया कराया जा सकता है।

वहीं पीठ ने जम्मू एवं कश्मीर सरकार पर लगे 50 लाख के जुर्माने के आदेश पर रोक लगा दी।

दरअसल एनजीटी ने कटरा से वैष्णो देवी मंदिर के रास्ते में घोड़ों और खच्चरों पर रोक के बाद उनके लिए पुनर्वास योजना को अंतिम रूप न देने के कारण जम्मू एवं कश्मीर सरकार पर 50 लाख रुपये का जुर्माना किया गया था।

जम्मू एवं कश्मीर सरकार की ओर से सोमवार को न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ को जानकारी दी गई कि पुनर्वास योजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है.

क्या कहा था NGT ने 

मीडिया में ये खबर आने के एक दिन बाद कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यनल ने अमरनाथ में मंत्र बोलने और जयकारा लगाने पर रोक लगा दी है, ट्रिब्यूनल ने 14 दिसंबर 2017 को  साफ किया कि सिर्फ जब लोग अमरनाथ जी महाशिवलिंग के सामने खडे होंगे- जो गुफा में प्राकृतिक तौर पर बनते हैं – तब आरती व अन्य रस्मों को छोडकर श्रद्धालु शांत रहेंगे ताकि महाशिवलिंग पर ध्वनि, गरमी व कंपन का कोई विपरीत प्रभाव ना पडे और बाद में जाने वाले श्रद्धालु भी शिवलिंग के दर्शन कर पाएं।

NGT के तत्कालीन चेयरमैन जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने  स्पष्ट किया था कि 13 दिसंबर 2017 के आदेशों के तहत ट्रिब्यूनल का ना  तो उद्देश्य था  और ना ही उन्होंने अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अंतर्गत आने वाले पूरे क्षेत्र को साइलेंस जोन घोषित किया। ये भी साफ किया जाता है कि गुफा में मंत्र आदि के उच्चारण पर रोजाना की आरती के दौरान रोक नहीं होगी।

बेंच ने  अपने आदेश में कहा था कि सीढियां खत्म होने से और पवित्र गुफा के क्षेत्र को साइलेंस जोन माना जाएगा। इस आदेश का बडा प्रचार हुआ और सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसकी आलोचना की।  बेंच ने फिर से मामले को लिया और कहा कि उसके आदेश को कई जगह सही तरीके से नहीं बताया गया।

इसमें किसी तरह की अस्पष्टता या ग़लतफ़हमी या गलत अर्थ ना निकाला जाए इसलिए बेंच ने ये उचित समझा कि ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में वास्तव में क्या कहा है।

इसके बाद बेंच ने नए दिशानिर्देश जारी किए थे :

  1. 13 दिसंबर 2017 के आदेशों के तहत ट्रिब्यूनल का ना  तो उद्देश्य था  और ना ही उन्होंने अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अंतर्गत आने वाले पूरे क्षेत्र को साइलेंस जोन घोषित किया।
  2. फिर से दोहराया जा रहा है कि  ट्रिब्यूनल ने जो इकलौती रोक लगाई वो साफ करने के लिए,  सिर्फ जब श्रद्धालु/ लोग अमरनाथ जी महाशिवलिंग के सामने खडे होंगे- जो गुफा में प्राकृतिक तौर पर बनते हैं तो वो शांत रहेंगे। ये रोक अन्य किसी क्षेत्र, जिसमें पवित्र गुफा तक जाने वाली सीढियां भी शामिल हैं, में लागू नहीं होगी।
  3. पवित्र गुफा से करीब 30 कदम पहले आखिरी सीढी पर कोई भी श्रद्धालु/ व्यक्ति कोई सामान नहीं ले जाएगा जो पहले से ही बोर्ड द्वारा किया गया है। ये साफ किया जा रहा है कि इस सीढी से नीचे की सीढियों पर किसी भी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है।
  4. श्राइन में भक्तों/ आने वालों की एक ही पंक्ति रहेगी
  5. सभी संबंधित पक्षों को इन निर्देशों का पालन करना होगा।
  6. हमारे विचार में ये निर्देश एक तरफ पवित्र गुफा कीपवित्रता और प्राचीनता को बनाए रखने और दूसरी ओर ये सुनिश्चित किया जा सके किमहाशिवलिंग पर ध्वनि, गरमी व कंपन का कोई विपरीत प्रभाव ना पडे और बाद में जाने वाले श्रद्धालु भी शिवलिंग के दर्शन कर पाएं
  7. गुफा में मंत्र आदि के उच्चारण पर रोजाना की आरती के दौरान ये  रोक नहीं होगी।

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