सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा, संवेदनशील मामलों में गवाहों की सुरक्षा को लेकर अगस्त तक तैयार हो योजना

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस ए के सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने केंद्र सरकार से कहा है कि हाईप्रोफाइल मामलों में गवाहों की सुरक्षा को लेकर अगस्त तक योजना तैयार कर कोर्ट को सौंपी जाए।  पीठ ने कहा कि आपराधिक मामलों में उन गवाहों की सुरक्षा को लेकर योजना बनाई जानी चाहिए जिन्हें आरोपियों से जान का खतरा है या हो सकता है।

वही शुक्रवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पहले 22 मार्च को सुरक्षा को लेकर राज्य सरकारों को पत्र लिखा था जिसके बाद कुछ राज्य सरकारों ने जवाब दाखिल किया। इसके बाद 11 अप्रैल को फिर से राज्यों को पत्र भेजा गया है।

नवंबर 2017 में हाई प्रोफाइल मामलों में गवाहों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने AG के के वेणुगोपाल से पूछा था कि क्या NIA एक्ट की तर्ज पर बाकी बडे मामलों में ही केंद्र सरकार गवाहों की सुरक्षा को लेकर कोई योजना ला सकती है ?

सुनवाई के दौरान जस्टिस ए के सीकरी ने AG से कहा था कि ये बात ठीक है कि देशभर में लाखों केस होते हैं और हर मामले में ये संभव नहीं है। लेकिन केंद्रीय गृहमंत्रालय हाईप्रोफाइल व संवेदनशील मामलों में कोई विशिष्ट योजना बना सकता है।

वहीं एमिक्स गौरव अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने केंद्र और सभी राज्यों को इस मुद्दे पर पत्र लिखा है और जवाब का इंतजार है।वहीं AG ने कहा कि वो केंद्रीयकृत योजना के समर्थन में हैं। इसे लेकर कोई केंद्रीय संस्था हो और उसके अंतर्गत चार क्षेत्रीय बॉडी इस पर काम करें। सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से पूछा था कि ऐसे गंभीर और हाईप्रोफाइल मामलों में गवाहों की सुरक्षा के लिए क्या- क्या क़दम उठाये हैं ?

तथाकथित गुरु आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं मामले में गवाहों की सुरक्षा को लेकर दाखिल जनहित याचिका के दायरे को बढाते हुए  सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस ए के सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से पूछा था कि संवेदनशील और हाई प्रोफाइल मामलों में गवाहों को किसी भी नुकसान से बचाने के लिए उनका विटनेस प्रोटेक्शन प्रोग्राम क्या है ?

केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल का पक्ष सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है उसमें गवाहों की सुरक्षा को लेकर एक प्रोगाम बनाने की बात कही गई है इसलिए बेहतर होगा कि सभी राज्य सरकारों से इस मामले में जवाब मांगा जाए। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को कहा था कि वो सभी राज्यों को पक्षकार बनाएं। कोर्ट ने सवाल भी उठाया कि अभी तक राज्यों ने विटनेस प्रोटेक्शन प्रोग्राम क्यों नहीं बनाया।

 AG ने ASG पिंकी आनंद के सहयोग से दलील देते हुए ये भी कहा कि जस्टिस डिलीवरी सिस्टम को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी है कि गवाहों को सुरक्षित रखा जाए ताकि वो ट्रायल के दौरान किसी डर में ना रहें।

दरअसल  सुप्रीम कोर्ट आसाराम मामले में मुख्य गवाह महिंदर चावला, रेप पीडित के पिता, मारे गए गवाह कर्मवीर सिंह के पिता और हत्या की कोशिश से बचे पत्रकार नरेंद्र यादव की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिकाकर्ताओं ने याचिका दाखिल कर आसाराम के खिलाफ नाबालिग से रेप मामले के 10 गवाहों पर हमले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।

 सुप्रीम कोर्ट ने इस बाबत पांच राज्यों को अपना जवाब दाखिल करने को कहा था। महिंदर चावला ने याचिका में गवाहों की सुरक्षा के लिए एक प्रोगाम बनाने की भी मांग की है। आसाराम का केस इस मामले में जोधपुर में चल रहा है।

दरअसल गुजरात और राजस्थान में चल रहे रेप के दो मामलों के तीन गवाहों की हत्या हो चुकी है जबकि दर्जनभर पर हमला हो चुका है। चावला 2001 से 2005 तक आसाराम का निजी सहायक रह चुका है। मई 2015 में पानीपत में उस पर जानलेवा हमला हुआ था जिसमें वो बच गया था।

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