अयोध्या मामला : सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप याचिकाओं पर सुनवाई से इंकार किया, कहा जमीन विवाद में तीसरे पक्ष का क्या मतलब [आर्डर पढ़े]

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और अब्दुल नज़ीर की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने स्पष्ट करते हुए कहा कि अयोध्या मामला जमीनी विवाद है और इसमें तीसरे पक्ष की बात नहीं सुनी जाएंगी। इसके साथ ही बेंच ने तीसरे पक्षों द्वारा दायर किए गए हस्तक्षेप के आवेदनों को खारिज कर दिया।

जब एक आवेदक ने कहा कि अयोध्या और फैजाबाद के 10,523 निवासियों ने विवाद के लिए समझौते के एक हस्ताक्षर पर हस्ताक्षर किए हैं तो पीठ ने कहा कि इस तरह के समझौते को अदालत के बाहर लागू किया जा सकता है, क्योंकि वर्तमान विवाद केवल कानूनी मुद्दा है। सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को कहा कि कोई अर्जी स्वीकार ना करें। पीठ ने कहा कि कोई भी इस मामले में पक्षकारों पर समझौता करने का दबाव नहीं डाल सकता। जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि ये मामला बडा है और बहुत कागजात हैं। तीसरे पक्ष को जमीनी विवाद सूट में नहीं रख सकते।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका को अयोध्या जमीन विवाद से बाहर किया है। पीठ ने कहा कि ये मामला कोई उचित बेंच छह हफ्ते के बाद सुनेगी। स्वामी की दलील थी कि उनकी जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ही इस मुद्दे के साथ जोडा था। इस पर बेंच ने इस मामले को उचित बेंच में भेज दिया

इस दौरान स्वामी ने कहा कि उनके मौलिक अधिकार जमीन अधिकार से बडे हैं। उनकी याचिका पर इस मामले की जल्द सुनवाई हुई है।

 

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