“न्याय न केवल किया जाना चाहिए बल्कि होते हुए भी दिखना चाहिए”, ये पीड़ित पर भी लागू : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि न्याय न केवल किया जाना चाहिए बल्कि होते हुए भी दिखना चाहिए, ये पीड़ित पर भी लागू होता है। हाईकोर्ट ने ये टिप्पणी पुलिस हिरासत में कथित तौर पर मार दिए गए व्यक्ति की पत्नी की ट्रांसफर याचिका पर सुनवाई करते हुए की। अदालत ने ये केस ट्रांसफर कर दिया।

दरअसल एक व्यक्ति की विधवा, जिसकी हत्या कथित  तौर पर पुलिस हिरासत में हुई थी, ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी जिसमें बलोदा बाज़ार के न्यायालय से रायपुर या आसपास के इलाके के किसी भी अन्य कोर्ट में आपराधिक मामले को ट्रांसफर करने की मांग की गई थी।

 उसने तर्क दिया कि पुलिस प्रशासन इस मामले को दबाने और फास्ट ट्रैक करने कोशिश कर रहा है। इस मामले में चश्मदीद गवाहों पर दबाव बनाकर तेज़ी दिखा रहा है। उसने अदालत के सामने पेश किया कि अभियोजन द्वारा नियुक्त वकील के अलावा उसकी ओर से मामले की बहस करने के लिए उसके द्वारा एक वकील को शामिल करने की अनुमति की अर्जी  को ट्रायल अदालत ने खारिज कर दिया था, हालांकि ये कहा था कि वह अंतिम दलीलों के  वक्त अपना बात रख सकती है।

अदालत ने एक चश्मदीद गवाह के बयान पर भी ध्यान दिया, जिसने शपथ पत्र दायर किया और कहा कि आरोपी के पक्ष में एक विशेष तरीके से एक बयान देने के लिए उस पर दबाव डाला गया था। अदालत ने यह भी कहा कि अभियुक्त, जो पुलिस कर्मी हैं और शेष गवाह बलोदा बाज़ार में रहते हैं, जहां मुकदमा लंबित है, इसलिए इस आरोप का खंडन नहीं किया जा सकता।

 “अगर पीड़ित व्यक्ति के कोण से देखा जाए कि  वो अन्याय का सामना करेंगे, क्योंकि लड़ाई पुलिस के पूरे विभाग के खिलाफ है, इस आशंका पर स्थल के हस्तांतरण के पक्ष में धारणा बनती है। अनुपात कि अभियुक्त के साथ न्याय न केवल किया जाना चाहिए, बल्कि ऐसा दिखना भी चाहिए, पीड़ित पर भी समान रूप से लागू होता है। मामले के तथ्यों की स्थिति को देखते हुए, हमारी राय है कि मामला रायपुर के एक सक्षम सत्र न्यायालय में स्थानांतरित किया जा सकता है, “न्यायमूर्ति गौतम भादुडी ने कहा और मामले को ट्रांसफर करने का आदेश दिया।

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