जज के खिलाफ ट्वीट: कभी PC का जूनियर नहीं रहा, दिल्ली HC के न्यायमूर्ति मुरलीधर ने शरारती ट्वीट के बाद रिकॉर्ड पर तथ्य दर्ज किया

सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने पत्रकार स्वामीनाथन गुरुमूर्ति द्वारा किए गए ट्वीट पर स्वत: संज्ञान लिया जिसमें न्यायमूर्ति एस मेहता के साथ डिवीज़न बेंच में शामिल जस्टिस एस मुरलीधर की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए थे। इसी बेंच ने आईएनएक्स मीडिया मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तारी से कार्ति चिदंबरम को अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था।

 न्यायमूर्ति मुरलीधर और न्यायमूर्ति मेहता की पीठ ने सोमवार को पत्रिका ‘तुगलक’ के संपादक एस गुरुमूर्ति द्वारा किए गए ट्वीट्स पर संज्ञान लिया।   बेंच ने 9 मार्च को पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति को अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी थी जब उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से अपनी याचिका वापस ले ली और उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर आशंका जताई कि उन्हें सीबीआई की हिरासत खत्म होने के तुरंत बाद ईडी द्वारा गिरफ्तार किया जाएगा।     सोमवार को पीठ ने कहा, 9 मार्च, 2018 को मौजूदा रिट याचिका पर सुनवाई के कुछ घंटों के भीतर एक ट्विटर हेंडल @sgurumurthy में  गुरुमूर्ति ने शरारतपूर्ण लिखा है कि “यह सच है कि आज जस्टिस मुरलीधर ने कार्ति का फैसला किया वो PC के  जूनियर थे ?  “

 उपरोक्त ट्वीट के तुरंत बाद एक अन्य ट्वीट में कहा, “यह दुख की बात है कि SC ने आज दिल्ली हाईकोर्ट को कार्ति मामले को तुरन्त सुनने को कहा  (यदि ऐसा नहीं है तो ईडी द्वारा गिरफ्तार किया जा सकता है तो यह कहकर) कि उन्हें संरक्षित करना है। और HC ने उन्हें सुरक्षित रखा, यह अपराधियों के लिए एक बाढ़ के द्वार खोलता है – कांग्रेस इसकी प्रमुख लाभकारी है। “

 गुरुमूर्ति के ट्वीटर हैंडल में 2.59 लाख अनुयायी हैं।  ” गुरुमूर्ति के उपरोक्त लापरवाह  ट्विटर के बाद उनके अनुसरण करने वालों से प्रतिक्रियाओं का एक हिमस्खलन शुरू हुआ। कई टिप्पणियां, जो पुन: प्रस्तुति के योग्य नहीं हैं, गलत सूचना पर जो प्रतिक्रिया दी गईं, इस पीठ के अध्यक्ष न्यायाधीश को स्केंडलाइज और न्यायपालिका की संपूर्णता पर सवाल उठाए गए हैं, ” न्यायमूर्ति मुरलीधर ने कहा।

 न्यायमूर्ति मुरलीधर ने कहा, “तमिलनाडु में बड़ी संख्या में प्रसारित एक पत्रिका के  संपादक होने के नाते एस गुरुमूर्ति को जांच करने की जरूरत थी, वह आसानी से पता लगा सकते थे कि इस पीठ के अध्यक्ष न्यायाधीश जी रामस्वामी, जो तत्कालीन भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल थे और बाद में भारत के लिए अटॉर्नी जनरल थे, उनके जूनियर थे। अध्यक्ष जज ने किसी भी वक्त याचिकाकर्ता के पिता, वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम के  जूनियर के रूप में काम नहीं किया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सही तथ्यात्मक स्थिति को स्पष्ट करते हुए कुछ ट्वीट्स के बावजूद गुरुमूर्ति ने अपने शरारती और झूठे ट्वीट को वापस करना नहीं चुना। “

 हालांकि आदेश के बाद गुरुमूर्ति द्वारा ट्विट को हटा दिया गया, उन्होंने  ट्वीट किया, “मैं समझता हूं कि न्यायमूर्ति मुरलीधरन ने दोनों पक्ष वकीलों को फोन किया  और उन्हें बताया कि वह कभी PC के जूनियर  नहीं थे। उन्हें दुख है कि न्यायाधीशों को सोशल मीडिया के गलत समाचार के खिलाफ कोई सुरक्षा नहीं है। ये न्यायाधीशों की जरूरत है। मैंने ट्वीट डिलीट किया है कि क्या वह पीसी के जूनियर थे ? “

न्यायमूर्ति मुरलीधर ने कहा कि उन्होंने स्वयं इस पर संज्ञान लिया  क्योंकि वह रिकार्ड पर सही तथ्यों को दर्ज करना चाहते थे। एएसजी तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि इस तरह के ट्वीट्स को ” नजरअंदाज करना सर्वश्रेष्ठ है।” हालांकि न्यायालय स्वीकार करता है कि ऐसे ट्वीट्स जो झूठे और परिवादात्मक जानकारी फैलाने वाले हैं, जैसा कि एएसजी तुषार मेहता ने कहा है , “सबसे अच्छा नजरअंदाज” करना चाहिए।एस गुरुमूर्ति के इस ट्विटर हैंडल में 2,59,000 अनुयायी हैं। सोशल मीडिया पर गलत सूचना दुर्भाग्य से जंगल की आग की तरह फैल गई है इसलिए न्यायालय ने इसे सही तथ्यों को रिकॉर्ड करने के लिए आवश्यक माना।

किसी भी कार्रवाई के आदेश के बिना, अदालत ने यह एएसजी और बार पर छोड़ दिया है कि क्या इस तरह के ट्वीट्स पर कोई भी कार्रवाई की जा सकती है।

    “न्यायालयों के निर्णय और आदेशों पर एक निष्पक्ष और सूचित आलोचना का स्वागत है, लेकिन एएसजी और बार यह विचार करें  कि क्या इस तरह के ट्वीट्स कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग करते हैं।”

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