सुप्रीम कोर्ट ने दामाद की हत्या की आरोपी महिला को बरी किया, ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले रद्द [निर्णय पढ़ें]

 शुरू में जब मृतक की पत्नी ने दर्ज शिकायत दर्ज कराई थी कि मृतक ने जहर लेकर आत्महत्या कर ली तो आम तौर पर यह उम्मीद की जाती है कि डॉक्टर रासायनिक पदार्थों के रासायनिक विश्लेषण के लिए विसरा रखेंगे… चिकित्सक द्वारा विसरा का गैर-संरक्षण अभियोजन पक्ष के लिए मामले में घातक बना, बेंच ने कहा 

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और उच्च न्यायालय के समवर्ती निष्कर्षों को दूर करके अपने दामाद की हत्या की आरोपी एक महिला को बरी कर दिया है। मृतक ब्रज भूषण तिवारी की पत्नी और सास पर हत्या का आरोप लगाया गया जब वो उनके घर गया था।

 मुकदमे के लंबित रहने के दौरान आरोपी की पत्नी की मृत्यु हो गई। ट्रायल कोर्ट ने सास को दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। बाद में  उच्च न्यायालय ने भी उसे दोषी ठहराया था।

 सर्वोच्च न्यायालय से यह आग्रह किया गया था कि मौत की वजह जहर था और मृतक ने जहर खाकर आत्महत्या की थी। यह भी तर्क दिया गया कि मृतक के जहर से आत्महत्या करने के तथ्य को दरकिनार कर दिया गया है और डॉक्टरों द्वारा विसरा संरक्षित नहीं किया गया था। न्यायमूर्ति एन.वी. रमना और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा : “ शुरू में जब  मृतक की पत्नी ने दर्ज शिकायत दर्ज कराई थी कि मृतक ने जहर लेकर आत्महत्या कर ली तो आम तौर पर यह उम्मीद की जाती है कि डॉक्टर रासायनिक पदार्थों के रासायनिक विश्लेषण के लिए विसरा रखेंगे । इस बिंदु पर अभियोजन अपने कर्तव्य में विफल रहा क्योंकि विसरा को संरक्षित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। केवल डॉक्टर-पीडब्ल्यू 6 के एक बयान में कहा गया है कि विसरा को संरक्षित नहीं किया गया क्योंकि इस मामले में जहर की विशिष्ट उपस्थिति पर्याप्त नहीं है खासकर जब स्वतंत्र पंच गवाहों के साथ ही जांच अधिकारी ने अपने विचार को दर्ज किया कि यह जहर का मामला था, जिसे 1, 2 और 3 पीडब्ल्यू द्वारा विधिवत समर्थित किया गया है। “

अभियुक्त को संदेह का लाभ देते हुए बेंच ने कहा कि आरोपी के मामले को मजबूत करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि मृतक ने आत्महत्या की थी।

 

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