जम्मू कश्मीर में अल्पसंखक हिंदुओं को भी प्रधानमंत्री योजना के लाभ की याचिका : सुप्रीम कोर्ट ने निस्तारण किया, कहा कानून बनाने को नहीं कह सकते

जम्मू कश्मीर में अल्पसंखक हिंदुओं को भी प्रधानमंत्री योजनाओं और सरकारी योजनाओं के तहत सुविधाएं देने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई बंद कर दी है।

सोमवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच ने कहा कि सरकार को कानून बनाने के लिए नही कहा जा सकता।

वहीं जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि 23 फरवरी को एक मेमोरेंडम जारी किया गया  जिसके मुताबिक वो राज्य में अल्पसंख्यकों के लिए जब जरूरत आएगी तो राज्य अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के लिए मुख्यमंत्री का एक स्पेशल प्रोजेक्ट चल रहा है।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और जम्मू कश्मीर सरकार को याचिका पर जवाब देने के लिए आठ हफ्ते का और वक्त दे दिया था।

केंद्र की ओर से AG के के वेणुगोपाल ने कहा था कि केंद्र की कमेटी इस मामले में सब पहलुओं को देख रही है और इसकी रिपोर्ट आने में अभी वक्त लगेगा।

इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक विभाग के सचिव और जम्मू कश्मीर के चीफ सेकेट्री की अगवाई में ज्वाइंट कमेटी का गठन किया गया है लेकिन उसमें जम्मू कश्मीर सरकार भाग नही ले रही है।

वहीं याचिकाकर्ता अंकुर शर्मा ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सरकार इस मामले में जानबूझकर देरी कर रही है।

लेकिन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि कोर्ट कैसे विधायिका को ये आदेश जारी कर सकता है कि वो कैसे पॉलिसी मैटर में काम करे।

दरअसल पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कोर्ट को बताया था इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक विभाग के सचिव और जम्मू कश्मीर के चीफ सेकेट्री की अगवाई में ज्वाइंट कमेटी का गठन किया गया है और कमेटी इस बारे में अपनी रिपोर्ट दाखिल करेगी।

इससे पहले याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा था। अंकुर शर्मा की याचिका में कहा गया कि राज्य में हिंदू अल्पसंख्यक हैं और मुस्लिम बहुसंख्यक हैं। इसके बावजूद राज्य में 68 फीसदी मुस्लिम लोगों को ही अल्पसंख्यक के तहत लाभ मिल रहें हैं जबकि सही में हिंदुओं को ये सुविधाएं मिलनी चाहिए।

याचिका में ये भी कहा गया कि पिछले 50 साल से राज्य में अल्पसंख्यकों को लेकर कोई गणना नहीं हुई है और ना ही अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया है इसलिए अल्पसंख्यक अल्पसंख्यक आयोग भी बनाया जाना चाहिए।

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