केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, केंद्र चुनावी सुधार की जरूरत से अवगत; कहा, यह एक सतत और लंबी प्रक्रिया है [जवाबी हलफ़नामा पढ़े]

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को कहा कि उसके साथ साथ चुनाव आयोग भी चुनाव सुधारों की आवश्यकता और समय समय पर इससे जुड़े क़ानूनों में सुधार करने की जरूरत को समझता है।

सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर दायर अपने जवाबी हलफनामे में केंद्र ने उक्त बातें कही। इस याचिका में चुनाव सुधार के बारे में केंद्र और चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है।

 उपाध्याय ने गत वर्ष सितम्बर में जनहित याचिका दायर की थी और संसद, विधान सभाओं और स्थानीय चुनावों के लिए एक ही चुनाव सूची के प्रयोग के बारे में निर्देश देने, वोटों की गिनती के लिए टोटलाइजर का प्रयोग, मतदाता पंजीकरण और सत्यापन के लिए पोस्ट ऑफिस को मुख्य एजेंसी बनाने और संसद, विधान सभाओं एवं पंचायतों तथा नगर निगमों के चुनाव रविवार को कराने के बारे में निर्देश देने का अनुरोध किया था।

 “…चुनाव आयोग देश में चुनाव सुधार के बारे में अवगत है, हालांकि यह एक जटिल, सतत और लम्बी प्रक्रिया है और केंद्र चुनाव आयोग के साथ मिलकर चुनाव सुधारों पर विचार विमर्श के लिए कई तरह के फोरमों के साथ विचार विमर्श और संबंधित क़ानून में संशोधन के लिए समय समय पर कदम उठा रहा है”, ऐसा केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा।

हलफनामे में उसने पूछा कि उपाध्याय ने यह नहीं बताया है कि कैसे वर्तमान व्यवस्था आम जनता के हित में नहीं है।

“याचिका में चुनाव रविवार को कराने, पोस्ट ऑफिस का पंजीकरण केंद्र के रूप में प्रयोग करने जैसी बातों का जो जिक्र किया गया है वह चुनाव आयोग के प्रशासनिक अधिकारों के तहत आते हैं…इसके तहत जो बातें कही गई हैं वह नीति निर्धारण की बातें हैं और यह पूरी तरह विधायिका के कार्यक्षेत्र में आती हैं”, अपने हलफनामे में केंद्र ने कहा।

हलफनामे में बताया गया कि ये बातें योगेश गुप्ता बनाम चुनाव आयोग एवं अन्य मामले के तहत विचाराधीन है।

केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा कि चुनाव आयोग ने ईवीएम के साथ टोटलाइजर के प्रयोग के बारे में पहले भी सुझाव दे चुका है और विधि आयोग ने अपनी 255वीं रिपोर्ट में चुनाव आयोग के इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। गृहमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रियों के समूह ने इसकी जरूरत से इंकार किया। इसलिए यह मामला अभी न्यायालय के विचाराधीन है।

मंत्रियों के समूह ने 7 सितम्बर 2016 को ने निष्कर्षतः यह कहा था कि मतों की गिनती ऐसे की जाए जिससे यह पता लग सके कि उम्मीदवारों को हर मतदान केंद्र पर कितने वोट मिले हैं। इससे पार्टियों को यह जानकारी मिल सकेगी कि किस क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। मंत्रियों के समूह का मानना था कि मीडिया आज जिस तरह से सक्रिय है, जिस क्षेत्र के लोगों ने किसी पार्टी को कम वोट दिया है, उनको उस पार्टी द्वारा प्रताड़ित करना आसान नहीं होगा।

 केंद्र ने कहा कि एक ही मतदाता सूची के प्रयोग का मामला चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है और इस बारे में वही निर्णय ले सकता है।

स्थानीय चुनावों में भी वही मतदाता सूची प्रयोग में लाए जाएं, यह निर्णय का अधिकार संबंधित राज्य सरकार या राज्य चुनाव आयोग का है और इस बारे में वही निर्णय ले सकते हैं।

 

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