तीन एड्वोकेटों पर हुए हमले पर दिल्ली हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया, दिल्ली पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा [आर्डर पढ़े]

दिल्ली हाई कोर्ट ने तीन एडवोकेट किरीत उप्पल, रवि शर्मा और विकास पाहवा पर हुए हमले पर स्वतः संज्ञान लिया है। इस घटना की वजह से दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने 25 जनवरी को कोर्ट का बहिष्कार किया था।

29 जनवरी को एक आदेश में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और सी हरि शंकर ने इस चिंताजनक घटना पर अफ़सोस जाहिर किया था। कोर्ट ने कहा था, “…हम इस घटना से काफी चिंतित हैं और लगता है कि बार एसोसिएशन और उसके नेताओं को अपने पेशेवर काम को करने से रोकने का प्रयास हो रहा है और उनको न्याय का साथ देने से रोकने की कोशिश हो रही है”।

कोर्ट ने एसोसिएशन द्वारा पास दो प्रस्तावों का जिक्र किया जब उन पर हमले हुए और उनके वाहनों को जला दिया गया। प्रस्ताव में संकेत दिया गया कि तीन एडवोकेटों पर हमले इसलिए हुए क्योंकि इन लोगों ने एक महिला एडवोकेट का समर्थन किया है। कोर्ट ने कहा कि हमला हुए चार सप्ताह से ज्यादा हो गया है, पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के अलावा और कुछ भी नहीं किया है।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले की प्राथमिकता से तहकीकात की जानी चाहिए थी क्योंकि अपराध गंभीर किस्म का है जिससे जन-धन का ज्यादा नुकसान हो सकता था।

कोर्ट ने कहा कि अगर यह स्थिति दिल्ली के बार के सदस्यों की है तो हमें यह सोचकर ही डर लगता है कि दिल्ली की गलियों में हिंसा को झेलने वाले आम लोगों की क्या हालत होती होगी।

कोर्ट ने कहा कि चूंकि हमला वकीलों को कानूनी मदद देने से रोकने के लिए किया गया है इसलिए यह कोर्ट की आपराधिक अवमानना का मामला बनता है। 

कोर्ट ने इसलिए इस मामले की जांच पर पुलिस से तीनों मामलों में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा और निर्देश दिया कि यह रिपोर्ट पुलिस आयुक्त को दिखाने के बाद विशेष पुलिस आयुक्त (क़ानून एवं व्यवस्था) के हस्ताक्षर से दाखिल किया जाए।

कोर्ट ने वरिष्ठ वकील दयान कृष्णन को इस मामले में अमाईकस क्यूरी नियुक्त किया है और सिद्धार्थ अग्रवाल को उनको मदद करने का निर्देश दिया है।

 

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