हमारे विद्रोही जज : न्यायमूर्ति जे चेल्मेश्वर

आज पूरे देश को न्यायमूर्ति जे चेल्मेश्वर, रंजन गोगोई, एमबी लोकुर और कुरियन जोसफ ने उस समय सकते में डाल दिया जब उन्होंने यह घोषणा की कि वे मीडिया से मुखातिब होंगे। वे देश के “विद्रोही” जज बन गए हैं। वे एक ऐसे जज बन गए हैं जिन्होंने देश के लोगों को यह बताने का ख़तरा मोल लिया है कि देश के इस शीर्ष और प्रतिष्ठित संस्थान में जो हो रहा है वह ठीक नहीं है। लेकिन उन्होंने ऐसा पहली बार नहीं किया है।  पर आज जो उन्होंने किया वह इन सब में अनूठा है।

एक मात्रडिसेन्टर”

सुप्रीम कोर्ट में अपने छह साल से अधिक समय में इससे पहले भी चेल्मेश्वर ख़बरों में रहे हैं और कई बार रहे हैं। जजों की नियुक्ति के तरीकों के बारे में एकमात्र उनका फैसला विरोध (4:1) में था। इसके बाद उन्होंने एनजेएसी का समर्थन किया और कॉलेजियम का यह कहते हुए विरोध किया कि वह “भाई-भतीजावाद की व्यंजना” बन गया है।

चेल्मेश्वर ने यह कहते हुए कि जब तक कॉलेजियम में होने वाली बातचीत के विवरण को सार्वजनिक नहीं किया जाता। उनकी मांग पर झुकते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जजों की नियुक्ति के बारे में उनके सुझावों को माना। इसके तहत कॉलेजियम के सदस्य किसी को नियुक्त करने और नियुक्त नहीं करने के बारे में लिखित टिपण्णी देंगे।

कॉलेजियम ने जजों की नियुक्ति में पारदर्शिता बरतने के लिए बढ़ते दबाव के कारण इन निर्णयों को सार्वजनिक करना शुरू कर दिया।

चेल्मेश्वर के अन्य निर्णय

न्यायमूर्ति चेल्मेश्वर उस पीठ के हिस्सा थे जिसने सूचना तकनीक अधिनियम, 2000 की धारा 66A को मनमाना, अत्यधिक और गैरानुपातिक रूप से अभिव्यक्ति के अधिकार आक्रमण करनेवाला कहते हुए असंवैधानिक करार दिया था।

वह उस तीन जजों वाले पीठ में भी शामिल थे जिसने आधार कार्ड की योजना को एक बड़ी पीठ को सौंपा ताकि इस बारे में प्रमाणिक विचार मिल सकें और यह समझा जा सके कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है कि नहीं और यह योजना उसका उल्लंघन तो नहीं करता।

अभी हाल में चेल्मेश्वर ने एडवोकेट कामिनी जायसवाल की याचिका पर सुनवाई की जिसने कोर्ट की निगरानी में एक विशेष जांच दल गठित कर एक मेडिकल कॉलेज से जुड़े घूस के कथित आरोपों की जांच की मांग की गई थी। इस याचिका में मांग की गई थी कि मुख्य न्यायाधीश को उस पीठ का हिस्सा नहीं होना चाहिए जो इस मामले की सुनवाई करे क्योंकि मेडिकल कॉलेज के मामले की सुनवाई करने वाले पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश ही कर रहे हैं।

चूंकि खंडपीठ ने इस मामले को पांच जजों वाली संवैधानिक पीठ को सौंप दिया गया था पर मुख्य न्यायाधीश ने एक दिन बाद इस मामले को एक नई पीठ को दे दिया। इस तरह उन्होंने खंडपीठ के निर्णय को पलट दिया। इसके बाद तीन जजों की पीठ ने इस याचिका को ही खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति चेल्मेश्वर आन्ध्र प्रदेश के हैं और सुप्रीम कोर्ट का जज बनने से पहले वे गौहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति 2011 में हुई।

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