केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, साइबर शिकायतें दर्ज कराने के लिए पोर्टल शीघ्र उपलब्ध होगा [आर्डर पढ़े]

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि बच्चों से संबंधित अश्लील साहित्य/बलात्कार/सामूहिक बलात्कार के बारे में वीडिओ व अन्य सामग्रियों का पता लगाने और ऑनलाइन साइबर शिकायत करने के लिए पोर्टल www.cyberpolice.gov.in 10 जनवरी 2018 तक तैयार हो जाएगा।

Prajwala Letter Dated 18.2.2015 Videos of Sexual Violence and Recommendations मामले की बंद कमरे में सुनवाई के दौरान पीठ को एएसजी ने कहा कि यह पोर्टल 10 जनवरी को प्रयोग के लिए तैयार हो जाएगा।

लेकिन स्थिति ऐसी नहीं है। 11 जनवरी 2018 को यह पोर्टल पूरी तरह काम नहीं कर रहा था। इस पोर्टल पर जाने के बाद आपको जो संदेश मिलता है वह है “आपको इस पोर्टल के प्रयोग की अनुमति नहीं है”।

पिछली सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर, न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने भारत सरकार को निर्देश दिया था कि बाल यौन शोषण, बाल अश्लील साहित्य, बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के वीडिओ के बारे में आम लोगों द्वारा शिकायत दर्ज करने के लिए पोर्टल 10 जनवरी 2018 तक तैयार हो जाना चाहिए।

यह भी कहा गया था कि इस पोर्टल की कुछ सुविधाएं 10 जनवरी तक लोगों को उपलब्ध हो जाएगी और आम लोग इस तरह की बातों के खिलाफ बिना अपनी पहचान बताए शिकायतें दर्ज करा पाएंगे जो कि बाद में संबंधित राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को जांच के लिए भेज दिए जाएंगे।

हालांकि एएसजी ने कोर्ट ने माना कि इस पोर्टल की कुछ सुविधाएं 10 फरवरी 2018 तक उपलब्ध होंगी।

सोमवार को एएसजी ने कहा कि इस पोर्टल की सिक्यूरिटी ऑडिट हो रही है और इसका ट्रायल हो रहा है और उम्मीद की जाती है कि यह प्रोयोग के लिए शीघ्र ही उपलब्ध हो जाएगा।

इस मामले की अगली सुनवाई अब 15 फरवरी को होने वाली है।

सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक इंक से भी यह बताने को कहा है कि वह इन सामग्रियों को उसको ऑनलाइन करते ही नवीनतम तकनीकों के उपयोग से उसकी निगरानी के लिए क्या कर रहे हैं।  कोर्ट ने फेसबुक के वकील से एक हलफनामा दायर कर यह बताने को कहा है कि ऐसी कोई तकनीक विकसित हो पाई है कि नहीं।

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