दिल्ली हाई कोर्ट के मौलिक मुक़दमों का प्रबंधन : हरीश साल्वे सुप्रीम कोर्ट को बताएंगे जरूरी उपाय [आर्डर पढ़े]

दिल्ली हाई कोर्ट की पैरवी करने वाले वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रंजन गोगोई और आर बनुमथी की पीठ से कहा कि वह वर्तमान क़ानून में संशोधन का सुझाव देंगे ताकि दिल्ली हाई कोर्ट को दीवानी मामलों को जल्दी से निपटाने में मदद मिले विशेषकर कमर्शियल विवादों को।

पीठ ने साल्वे से छह सप्ताहों के भीतर अपने सुझावों को उसके समक्ष एक नोट के रूप में रखने को कहा।

पीठ ने साल्वे को दिल्ली उच्च न्यायालय (ओरिजिनल साइड) नियम, 2018 को और ज्यादा व्यापक और प्रभावकारी बनाने को लेकर उनके विचार मांगे। अभी हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्ण कोर्ट ने उसको अनुमोदित कर दिया है और अब उसको अधिसूचित किया जाना है। साल्वे को इसके नियमों में परिवर्तन सुझाने को भी कहा गया।

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने उन सात प्रश्नों को लेकर एक रिपोर्ट दायर किया था जो सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल दिसंबर में उससे पूछा था। ये प्रश्न थे- हर दिन संयुक्त रजिस्ट्रार कितने मामलों को देखते हैं; साक्ष्य की रिकॉर्डिंग में एक दिन में कितना समय लगाया जाता है; क्या हर कार्य दिन पर साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग होती है; साक्ष्य की रिकॉर्डिंग के लिए कुल कितने आयुक्त नियुक्त किए गए हैं; हर दिन कितने मामले निपटाए जाते हैं; पिछले सात दिनों में संयुक्त आयुक्तों/रजिस्ट्रारों ने कितने साक्ष्य रिकॉर्ड किए; हर दिन के काम के लिए आयुक्तों को औसतन कितनी राशि मिलती है; और कितने आईपीआर मामले सुनवाई के अंतिम चरण में हैं और कितनी अदालतों में ये मामले नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं।

यह मामला अंतरिम आदेश में मुक़दमे की विशेषता पर भारी भरकम फैसले से जुड़ा है जिस पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है।

 

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