सुप्रीम कोर्ट से पश्चिम बंगाल से केंद्र को CAPF की चार और कंपनी हटाने की इजाजत

सुप्रीम कोर्ट से पश्चिम  बंगाल से केंद्र को  CAPF की चार और कंपनी हटाने की इजाजत

पश्चिम बंगाल सरकार के कडे विरोध के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने दार्जलिंग और कालिमपोंग से केंद्र सरकार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ( CAPF )की चार और कंपनियां हटाने की अनुमति दे दी है। अब वहां पर चार ही कंपनियां बल रहेगा।

सोमवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच ने केंद्र सरकार की गुजरात  चुनाव के लिए आठ कंपनियों में से चार तक हटाने की गुहार को मंजूर कर लिया।

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से AG केके वेणुगोपाल ने कहा कि सुरक्षा बल किस संख्या में और किस जगह तैनात रहें ये फैसला केंद्र सरकार के अधिकारक्षेत्र में है। कोर्ट को इसमें दखल नहीं देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इलाके में  हालात अब काबू में है और हाईवे भी साफ हो चुका है। केंद्र सरकार को ये सुरक्षा बल गुजरात चुनाव में तैनात करने के लिए चाहिए। असम में केंद्रीय सुरक्षा बलों की 300 से ज्यादा कंपनियां तैनात हैं क्योंकि वहां विदेशियों की पहचान का काम चल रहा है।वैसे भी राज्य सरकार के पास बल मौजूद है। AG ने कहा कि  इस तरह की याचिका पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए क्योंकि इससे विपरीत प्रभाव पड सकता है

वहीं ममता सरकार की ओर से इसका विरोध किया गया। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि केंद्र सरकाप इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है।राज्य सरकार ने हालात का जायजा लेने के लिए कमेटी भी बनाई है और वो इसकी रिपोर्ट केंद्र को सौंपेगी। हालांकि केंद्र सरकार ने इसका विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई जनवरी के पहले हफ्ते में करेगा।

गौरतलब है कि 27 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पश्चिम बंगाल के दार्जलिंग और कालिमपोंग से सुरक्षा बलों की सात कंपनियों को हटाने की इजाजत दे दी थी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के सुरक्षा बल हटाने पर लगाई रोक के आदेश पर स्टे लगा दिया था।

केंद्र की अर्जी पर सुनवाई करते हुए चीफ  जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा था कि अब कलकत्ता हाईकोर्ट मामले की सुनवाई नहीं करेगा। वहीं कोर्ट ने इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा था।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा था कि अंतरिम आदेश के तहत केंद्र  केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की सात कंपनियों को हटा सकता है लेकिन आठ कंपनियां वहीं रहेंगी। कोर्ट ये देखेगा कि ऐसे मामलों में कोर्ट क्या दखल दे सकता है ? अगर नागरिकों के लिए दखल दे सकता है तो किस हद तक ? चीफ जस्टिस ने कहा  था कि लोगों को हिंसा रोकनी चाहिए।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश ASG मनिंदर सिंह ने कहा था कि कोर्ट को ऐसे मामलों की सुनवाई नहीं करनी चाहिए जिनमें सुरक्षा बलों की तैनाती का मामला शामिल हो। केंद्र सरकार भी वहां के हालात को लेकर चिंतित है।

वहीं ममता सरकार की ओर से पेश राकेश द्विवेदी ने केंद्र सरकार की अर्जी का विरोध किया और कहा था कि राज्य में कानून व्यवस्था के लिए सुरक्षा बल नहीं हटाया जाना चाहिए।दरअसल केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें  पश्चिम बंगाल के दार्जलिंग और कालिमपोंग से सुरक्षा बलों की सात कंपनियों को हटाने पर 27 अक्तूबर तक रोक लगा दी गई थी। केंद्र सरकार ने हालात को देखते हुए 15 में से सात कंपनियों को हटाने का फैसला लिया था। इससे पहले राज्य सरकार ने केंद्र को 25 दिसंबरतक बलों को ना हटाने को कहा था। लेकिन केंद्र के इंकार के बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। केंद्र का कहना था कि चुनाव आयोग ने भी गुजरात व हिमाचल प्रदेश में चुनाव के लिए सुरक्षा बलों की मांग की है। केंद्र को इस बल को बर्मा की सीमा से लगते राज्यों में तैनात करना था।