जांच में विसंगतियों का फायदा आरोपी को मिले : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

जांच में विसंगतियों का फायदा आरोपी को मिले : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जांच की विसंगतियों का फायदा आरोपी को दिया जाना चाहिए।

झारखंड राज्य बनाम जरनैल सिंह केस में ये कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस फैसले पर मुहर लगाई है जिसमें हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आरोपी को दोषी करार देने के फैसले को पलट दिया था।

दरअसल ट्रायल कोर्ट ने जरनैल सिंह को IPC की धारा 307 और आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत दोषी करार दिया था। लेकिन हाईकोर्ट ने पुलिस जांच में कमियों को देखते हुए उसे बरी कर दिया। हाईकोर्ट के फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

जस्टिस आरके अग्रवाल और जस्टिस ए एम सपरे ने कहा कि गवाहों की आंखों देखी बातों के मुकाबले हाईकोर्ट द्वारा पाई गई जांच में कमियां ना तो असंगत हैं और ना ही किसी तरीके से महत्वहीन या फिर तकनीकी प्रकृ्ति की। कोर्ट के विचार से अभियोजन को हाईकोर्ट द्वारा पाई गई विसंगितयों पर ध्यान देना चाहिए था और चार्जशीट दाखिल करने से पहले उन्हें दुरुस्त करने के लिए कदम उठाना चाहिए था। जो कि नहीं किया गया। ऐसे में इन कमियों का फायदा हाईकोर्ट ने सही तरीके से प्रतिवादी को दिया है।

जांच में हाईकोर्ट द्वारा पाई गई विसंगतियों में मुख्य ये था कि शरीर पर लगी गोली के निशान को क्यों चिन्हित नहीं किया गया ? इसके अलावा अभियोजन इसका भी जवाब नहीं दे पाया कि घटना के बाद आरोपी ने पिस्तौल अपनी जेब में क्यों रखी और लंबे वक्त तक वो इसे लेकर घूमता क्यों रहा ?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के दोषी करार देने के फैसले को पलटते हुए आरोपी को बरी करने के पीछे सारे सबूतों को देखते हुए कारण दिए हैं। ऐसे में कोर्ट बरी करने के फैसले में दखल नहीं देना चाहता।