शिकायतकर्ता की मौत होने पर कानूनी उत्तराधिकारी मुकदमे को आगे बढा सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा है कि शिकायतकर्ता की मृत्यू होने पर उसके कानूनी उत्तराधिकारी कोर्ट में मुकदमे को आगे चला सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ये व्यवस्था चांद देवी डागा बनाम मंजू के हमातानी केस में दी है।

वर्तमान केस में छत्तीसगढ हाईकोर्ट सेशन कोर्ट के रिवीजन पेटिशन को खारिज करने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई कर रहा था। सुनवाई लंबित होने के वक्त ही शिकायतकर्ता की मौत हो गई और उसके कानूनी उत्तराधिकारियों ने अर्जी दाखिल कर कोर्ट में उनकी जगह पक्षकार बनाने की गुहार लगाई। हाईकोर्ट ने उनकी अर्जी को मंजूर कर लिया। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

जस्टिस ए के सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने कहा कि यहां तक कि समन ट्रायल में भी ये जरूरी या अनिवार्य नहीं है कि शिकायतकर्ता की मौत के बाद शिकायत को रद्द कर दिया जाए। सेक्शन 256(1) के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए मजिस्ट्रेट शिकायत को जारी रख सकता है।

चूंकि शिकायत में  IPC के सेक्शन 420, 467,468,471,120B और 34 के आरोप लगाए गए थे, कोर्ट ने ये भी कहा कि चेप्टर XIC में मजिस्ट्रेट द्वारा ट्रायल ऑफ वारंट केसों में शिकायतकर्ता की मौत होने पर शिकायत को खारिज करने का कोई प्रावधान नहीं है।

बेंच ने कहा कि अगर कोड 1973 का ये उद्देश्य होता कि वारंट केस में शिकायतकर्ता की मौत होने पर शिकायत को खारिज किया जाना चाहिए, तो ये प्रावधान इस उद्देश्य की ओर इशारा करता जो साफ तौर उपलब्ध नहीं है।

कोर्ट ने शिकायतकर्ता के उत्तराधिकारी कानूनी कार्रवाई को जारी रख सकते हैं, इसे बककरार रखने के लिए जिम्मी जहांगीर मदान बनाम बॉली सियापा हिंडले ( मृत) एलआरएस द्वारा, (2004) 12 SCC 509, और अश्विनी नानूभाई व्यास बनाम महाराष्ट्र राज्य, AIR 1967 SCC 983) केस का हवाला दिया।

 

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