सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति की परीक्षा के लिए अनिवार्य स्नातक डिग्री के नियम को असंवैधानिक करार दिया [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति की परीक्षा के लिए अनिवार्य स्नातक डिग्री के नियम को असंवैधानिक करार दिया [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के उस नियम को अंसवैधानिक करार दिया है जिसमें पदोन्नति के लिए होने वाली परीक्षा में बैठने के लिए स्नातक की डिग्री अनिवार्य की गई थी।

जस्टिस कूरियन जोसफ और जस्टिस आर बानूमति ने इस विधान को संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करार दिया।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार के फोरेस्टर, फोरेस्ट गार्ड, रेंजर- सर्वेयर, सर्वेयर, हेड क्लर्क, अकाउंटेंट, क्लर्क कम टाइपिस्ट ( रिक्रूटमेंट) रूल्स 1987 के नियम 7 को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी गई थी। इसमें 2013 के बाद किए गए संशोधन के तहत वन विभाग में फोरेस्ट गार्ड की फोरेस्टर के तौर पर पदोन्नति के लिए किन्हीं दो में से एक शर्त पूरी करने को कहा गया। पहली ये कि वरिष्ठता और फिटनेस के आधार पर अगर फोरेस्ट गार्ड के तौर पर किसी ने कम से कम तीन साल तक काम किया हो। दूसरी ये कि लिमिटेड डिपार्टमेंट कंपीटीटिव एग्जामिनेशन में तैयार मेरिट लिस्ट के आधार पर। आगे ये भी शर्त थी कि इस परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रत्याशी ने महाराष्ट्र सरकार के वन विभाग में पांच साल तक फोरेस्ट गार्ड के तौर पर नौकरी की हो और किसी मान्यता प्राप्त विश्विद्यालय से स्नातक डिग्री हासिल की हो। 2013 में संशोधन के तहत इसके लिए 75 फीसदी कोटा वरिष्ठता के आधार पर रखा गया जबकि 25 फीसदी कोटा परीक्षा के आधार पर।

याचिका में कहा गया कि परीक्षा में शामिल होने के लिए स्नातक की योग्यता के लिए बनाया गया नियम 7 संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत भेदभाव करता है।

वहीं राज्यों की ओर से कहा गया कि ये संशोधन इसलिए किया गया ताकि वन विभाग में जवान लोग भर्ती हो सकें क्योंकि फोरेस्ट गार्ड के लिए कडी शारीरिक मेहनत करनी होती है।

बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि पदोन्नति के लिए उन जवान कर्मियों को भी मौका दिया जाना चाहिए जिनके पास जरूरी अनुभव है और वो इस काम में पारंगत हैं भले ही उनके पास स्नातक डिग्री ना हो। कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में स्नातक डिग्री की योग्यता जरूरी होती है लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया है। इस मामले में परीक्षा में बैठने के लिए सिर्फ स्नातक को इजाजत देने वाला नियम एक वर्ग के भीतर ही वर्ग के बीच समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने टीआर कोथंदरमन व अन्य बनाम तमिलनाडू वाटर सप्लाई एंड ड्रेनेज बीडी व अन्य  [(1994) 6 SCC 282] का हवाला देते हुए कहा कि वो फोरेस्ट गार्ड की पदोन्नति के स्नातक डिग्री के आधार पर  किसी आरक्षण का पक्षकार नहीं है और इस डिग्री को सिर्फ परीक्षा में बैठने के लिए ही अनिवार्य किया गया है। इसलिए ये संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 का उल्लंघन है। कोर्ट ने नियम 7(2) को जिसमें परीक्षा में बैठने के लिए स्नातक डिग्री अनिवार्य की गई थी, उसे असंवैधानिक घोषित कर दिया।