राज्य को संसदीय सचिव का पद क्रिएट करने का अधिकार नहींः सुप्रीम कोर्ट ने असम संसदीय सेक्रेटरीज एक्ट को रद्द किया

असम के संसदीय सेक्रेटरीज (एपाइंटमेंट, सैलरी, अलाउएंस, मिसलेनियस प्रोविजन) एक्ट 2004 को सुप्रीम कोर्ट ने गैर संवैधानिक करार दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे. चेलामेश्वर, जस्टिस आऱके अग्रवाल और जस्टिस एएम सप्रे की बेंच ने कहा कि असम के विधायिका के पास ये अधिकार नहीं था कि वह संसदीय सेक्रेटरीज बनाएं। सुप्रीम कोर्ट के सामने ये सवाल उठा था कि अनुच्छेद-194 (3) और 7 वीं अनुसूची की 2 वीं लिस्ट के तहत जो 39 इंट्री है उशके तहत क्या राज्य विधायिका को अधिकार है कि वह इस बाबत एक्ट बनाए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि एंट्री 39 के तहत विधायिका को विशेषाधिकार दिया गया है। वहीं अनुच्छेद-194 (3) के तहत राज्य लेजिस्लेटर को अधिकार है कि वह विधानसभा में मेंबर व कमिटी के मामले में विशेषाधिकार का इस्तेमाल करे। राज्य विधायिका को ये अधिकार नहीं है कि वह अनुच्छेद-194 (3) के तहत ऑफिसर के पद को श्रृजित करे। कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद-194 (3) में जो अधिकार दिए गए हैं उसके तहत अधिकारी के पद क्रिएट हों ये अधिकार के विपरीत है। अदालत ने कहा कि विधायिका को ये अख्तियार नहीं है और इस तरह संसदीय सेक्रेटरीज बनाए जाने को सुप्रीम कोर्ट ने गैर संवैधानिक करार दे दिया है।

 

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