क्या होते हैं संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध? आम आदमी के लिए यह जानना इसलिये है ज़रूरी

क्या होते हैं संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध? आम आदमी के लिए यह जानना इसलिये है ज़रूरी

अगर आपको यह जानना है कि संज्ञेय अपराध कौन से हैं तो आपको क्रीमिनल प्रोसिजर कोड (CrPC 1973) का शेड्यूल 1 देखना होगा, जिसमें हत्या, बलात्कार, दहेज़ हत्या, अपहरण, दंगा करना आदि को संज्ञेय अपराध की सूची में रखा गया है।

आमतौर पर समाज के विरुद्ध किए गए किसी भी कार्य को अपराध कहा जाता है। मानवीय समाज को चलाने के लिए कुछ नियम कायदे कानून बनाए जाते हैं और इनके खिलाफ कोई भी कृत्य अपराध की श्रेणी में आता है। अपराध जो करता है उसे अपराधी कहा जाता है। अपराध, अपराधी, अपराधी का स्वभाव और अपराधी के सुधार का अध्ययन अपराध शास्त्र के अंतर्गत किया जाता है।

हम समाज में रहते हैं और अपराध समाज में ही होते है अत: इनसे हमारा सीधा संबंध होता है। कब, कौन, किस तरह कौन से अपराध की चपेट में आ जाए, यह कहा नहीं जा सकता, इसलिए एक आम आदमी को अपराध के बारे में मोटे तौर पर बुनियादी समझ रखना आवश्यक है। अपराध को दो प्रकार का माना गया है संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध : Cognisable offence and Non Cognisable offence

संज्ञेय अपराध :

संज्ञेय और असंज्ञेयअपराध की परिभाषा क्रीमिनल प्रोसिजर कोड (CrPC 1973) की धारा 2 (सी) और 2 (एल) में दी गई है। इस अधिनियम की धारा 2 (सी) कहती है कि ऐसा अपराध जिसमें पुलिस किसी व्यक्ति को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार कर सकती है, वह संज्ञेय अपराध कहलाता है। पुलिस के पास संज्ञेय अपराधों में बिना वारंट गिरफ्तार करने के अधिकार है।

संज्ञेय अपराध कौन से हैं :

अगर आपको यह जानना है कि संज्ञेय अपराध कौन से हैं तो आपको क्रीमिनल प्रोसिजर कोड (CrPC 1973) का शेड्यूल 1 देखना होगा, जिसमें हत्या, बलात्कार, दहेज़ हत्या, अपहरण, दंगा करना आदि को संज्ञेय अपराध की सूची में रखा गया है। यहां आपको संज्ञेय अपराध की पूरी लिस्ट मिलेगी। इस लिस्ट में गंभीर प्रवृति के अपराध शामिल किए गए हैं।

असंज्ञेय अपराध :

क्रीमिनल प्रोसिजर कोड (CrPC 1973) की धारा 2 (एल) कहती है कि ऐसे अपराध जिनमें पुलिस को बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है, वे अपराध असंज्ञेय अपराध कहलाते हैं।

असंज्ञेय अपराध कौन से हैं :

असंज्ञेय अपराध को हम कुछ उदाहरणों से समझ सकते हैं। जैसे किसी की धार्मिक भावना को कुछ शब्दों से भड़काना असंज्ञेय अपराध है और भारतीय दंड सहिंता की धारा 298 यह कहती है कि इस अपराध में पुलिस बिना किसी वारंट के गिरफ्तारी नहीं कर सकेगी।

किंतु भारतीय दंड संहिता की धारा 296 यह कहती है कि यदि किसी धार्मिक सभा, प्रार्थना स्थल में किसी तरह की बाधा डाली जाए तो यह संज्ञेय अपराध होगा। इसी तरह भारतीय दंड संहिता की धारा 312 के अनुसार किसी का गर्भपात करवाना असंज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अलावा झूठे साक्ष्य देना, धोखाधड़ी, मानहानि जैसे अपराध को असंज्ञेय अपराधों की श्रेणी में रखा गया है।