जानिए कैसा रहा सुप्रीम कोर्ट में पिछला सप्ताह, वीकली राउंड अप पर एक नज़र

जानिए कैसा रहा सुप्रीम कोर्ट में पिछला सप्ताह, वीकली राउंड अप पर एक नज़र

सुप्रीम कोर्ट में 18 नवंबर से लेकर 22 नवंबर तक कौन से बड़े और महत्वपूर्ण मामले सुने गए इस पर एक नज़र। सुप्रीम कोर्ट में पिछला सप्ताह काफी हलचल वाला रहा। देखिए वीकली राउंड अप।

वरिष्ठता तब से आंकी नहीं जा सकती, जब तक कोई सेवा में पदस्थ ना हुआ हो : सुप्रीम कोर्ट

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि सेवा न्यायशास्त्र के तहत वरिष्ठता का दावा उस तिथि से नहीं किया जा सकता जब कोई कैडर में पदस्थ ना हुआ हो। न्यायमूर्ति आर बानुमति, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ मणिपुर पुलिस सेवा ग्रेड II अधिकारी संवर्ग में अंतर-वरिष्ठता विवाद से संबंधित मामलों में मणिपुर उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील पर विचार कर रही थी।

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सीपीसी का ऑर्डर 8 रूल 6 एः लिखित बयान दाखिल हो जाने के बाद भी प्रति-दावे पर रोक नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि एक अदालत अपने विवेक का प्रयोग कर मुकदमे के मुद्दों को तैयार होने तक लिखित बयान के बाद भी प्रति-दावा दाखिल करने की अनुमति दे सकती है। जस्टिस एनवी रमाना की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि सीपीसी के ऑर्डर 8 रूल 6 ए लिखित बयान दर्ज होने के बाद प्रति-दावा दाखिल करने पर कोई रोक नहीं लगाता है।

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आईपीसी 498 ए के केस में ट्रायल के बाद पति बरी हो चुका है तो वह क्रूरता के आधार पर तलाक मांग सकता है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब पति भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के तहत अपनी पत्नी द्वारा लगाए गए अपराध के आरोप से बरी हो जाता है, तो यह नहीं कहा जा सकता है कि उसके साथ कोई क्रूरता नहीं हुई है। इस मामले में [रानी नरसिम्हा शास्त्री बनाम रानी सुनीला रानी], हाईकोर्ट ने यह देखते हुए पति को तलाक देने से इंकार कर दिया था कि पत्नी ने भरण-पोषण की मांग की थी या उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 498 ए के तहत दंडनीय अपराध के लिए शिकायत दर्ज की थी। इन्हें क्रूरता के आधार पर तलाक लेने का वैध आधार नहीं कहा जा सकता।

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मोटर व्हीकल एक्ट : दावा की गई राशि से अधिक राशि का मुआवजा दिया जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि इस बात की अनुमति है कि मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजे की राशि उस राशि से अधिक हो सकती है ,जितनी राशि के लिए दावा किया गया था।

शीर्ष न्यायालय के समक्ष (जब्बार बनाम महाराष्ट्र एसआरटीसी) दावेदार की तरफ से दलील दी गई कि उसने अपने दावे को 3 लाख रुपये तक सीमित कर दिया था, इस तथ्य के को उसको लगी चोटों के लिए उसे उचित और न्यायसंगत मुआवजा न देने का आधार नहीं बनाया जा सकता है।

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गुस्सैल पूर्व कर्नल ने अपने कंपाउड में फल तोड़ रहे लड़के को गोली मारी थी, सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, पढ़िए जजमेंट

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल को हत्या के आरोपों से बरी कर दिया और इसे गैर इरादतन हत्या का केस माना। पूर्व कर्नल पर अपने डिफेंस एन्क्लेव से फल तोड़ रहे एक लड़के की हत्या करने का आरोप था। उसे हत्या के लिए दोषी नहीं ठहराया गया और सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए उसे गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया।

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COFEPOSA : अगर निरोधी पहले से ही न्यायिक हिरासत में है तो भी निरोधक हिरासत के आदेश दिए जा सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति न्यायिक हिरासत में है तो भी उसे COFEPOSA जैसे निरोधक कानून के तहत हिरासत में लिया जा सकता है। दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द करते हुए, जिसमें विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1974 [COFEPOSA], तहत कुछ लोगों की हिरासत को रद्द कर दिया था, न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित, न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने कहा कि ऐसी हिरासत वैध है बशर्ते कि निरोधक प्राधिकरण द्वारा विवेक का इस्तेमाल किया गया हो

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' स्वीकार ' की गई याचिका को वैकल्पिक उपाय के आधार पर खारिज करने पर कोई रोक नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि रिट याचिका को स्वीकार करने के बाद वैकल्पिक उपाय के आधार पर उच्च न्यायालय द्वारा इसे खारिज करने पर कोई रोक नहीं है। इस मामले में आयकर प्राधिकरण के आदेश (आयकर अधिनियम की धारा 115QA के तहत देयता का निर्धारण) के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय के समक्ष एक रिट याचिका दायर की गई थी। जब सुनवाई के लिए मामला सामने आया तो प्रारंभिक आपत्ति दर्ज की गई कि अपील दायर करने का वैकल्पिक और प्रभावी उपाय उपलब्ध है, हालांकि, अदालत ने याचिका को स्वीकार कर लिया और नोटिस जारी किया। साथ ही एक अंतरिम आदेश भी पारित किया गया।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट के डीजे पर प्रतिबंध लगाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई, पढ़िए आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर प्रभावी रोक लगा दी है, जिसमें डीजे के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया था। प्रतिबंध को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस विनीत सरन की पीठ ने संबंधित अधिकारियों से डीजे बजाने की अनुमति मांगने वाले आवेदनों पर फैसला करने को कहा। कोर्ट ने कहा कि डीजे सेवाओं के लिए अनुमति दी जानी चाहिए, यदि आवेदन कानून के अनुसार है।

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18 से 21 वर्ष के बीच की आयु के पुरुष को वयस्क महिला से विवाह करने पर सज़ा नहीं दी जा सकती : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि 18 से 21 वर्ष के बीच की आयु का पुरुष, जो किसी वयस्क महिला के साथ विवाह का करार करता है, उसे बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की धारा 9 के तहत दंडित नहीं किया जा सकता।

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आधार को संपत्ति से जोड़ने की याचिका : दिल्ली सरकार ने हलफनामा दाखिल कर कहा, पुट्टास्वामी फैसले के मुताबिक आधार अनिवार्य नहीं

दिल्ली सरकार ने एक जनहित याचिका के जवाब में दिल्ली हाईकोर्ट में एक हलफनामा दायर किया है जिसमें चल और चल संपत्ति के दस्तावेजों को आधार से जोड़ने की मांग की गई है। अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया है कि दोनों सरकारों को भ्रष्टाचार, काला धन और बेनामी लेनदेन पर लगाम लगाने के लिए नागरिकों की चल-अचल संपत्ति के दस्तावेजों को उनके आधार नंबर से जोड़ने के लिए उचित कदम उठाने के लिए निर्देश जारी किए जाएं।

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सुप्रीम कोर्ट ने NGT के बैन पर RO निर्माता कंपनियों को दस दिनों में केंद्र सरकार के पास सामग्री रखने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) के निर्माताओं को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ उनकी शिकायत पर संबंधित सामग्री के साथ दस दिनों के भीतर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से संपर्क करने के लिए कहा है।

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सुप्रीम कोर्ट ने निजी संस्थाओं को अनुमति देने वाले आधार संशोधन अधिनियम पर केंद्र और UIDAI को नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आधार और अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम 2019 की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाने वाली एक याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को नोटिस जारी किया है जिसमें निजी संस्थाओं को नागरिकों के आधार डेटा का उपयोग करने की अनुमति दी गई है। कोर्ट ने इस मामले को पुरानी याचिका के साथ जोड़ दिया है।

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हरेन पंड्या हत्याकांड : सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की पुनर्विचार याचिका खारिज की, सजा बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने 2003 में गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री हरेन पंड्या की हत्या के मामले में दस दोषियों की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस विनीत सरन की पीठ ने आदेश में कहा कि पुनर्विचार याचिकाओं पर गौर करने के बाद ये पाया है कि पुराने फैसले में कोई त्रुटि नहीं है और इसलिए उस पर फिर से विचार करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

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अभियोजन पक्ष की सहायता के लिए नियुक्त निजी वकील जिरह और गवाहों का परीक्षण नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हालांकि, पीड़ित व्यक्ति अभियोजन पक्ष की सहायता के लिए एक निजी वकील को मामले में शामिल कर सकता है, लेकिन ऐसे वकील को मौखिक रूप से दलील देने या गवाहों का परीक्षण करने और जिरह करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।

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चुनाव के अंतिम परिणाम की घोषणा से पहले आंकड़ों का वास्तविक और सटीक सामंजस्य स्थापित हो, सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर चुनाव आयोग (ECI) को किसी भी चुनाव के अंतिम परिणाम की घोषणा से पहले मतदान और मतगणना के डेटा का वास्तविक और सटीक सामंजस्य स्थापित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और कॉमन कॉज द्वारा दायर जनहित याचिका में कोर्ट से कहा गया कि वो 17 वीं लोकसभा चुनाव परिणामों में चुनाव के आंकड़ों में विसंगतियों की जांच करने के लिए ECI को निर्देश दें और भविष्य के सभी चुनावों की जांच के लिए एक मजबूत प्रक्रिया तैयार करें।

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जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंध : सरकार के वकीलों के पेश न होने से सुप्रीम कोर्ट हुआ नाराज, याचिकाकर्ताओं ने कहा, जीने के अधिकार का उल्लंघन

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने के बाद इंटरनेट, संचार माध्यमों व अन्य प्रतिबंध लगाने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की ओर से वकीलों के पेश ना होने पर नाराज़गी जताई।

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