वकील अदालतों के कामकाज को सुचारू बनाने के लिए बाध्य, कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने वकीलों से काम से दूर न रहने की अपील की

वकील अदालतों के कामकाज को सुचारू बनाने के लिए बाध्य,  कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने वकीलों से काम से दूर न रहने की अपील की

कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अभय.एस. ओका ने एक बयान जारी किया है, जिसमें राज्य में वकीलों से अदालत के काम से परहेज न करने या अनुपस्थित न रहने और अदालत के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

इस बयान में कहा गया है कि

''यह कानून की एक स्पष्ट स्थिति है कि अदालत के काम को रोकना या अदालती कार्यवाही का बहिष्कार करना और बार एसोसिएशनों के पदाधिकारियों द्वारा बार के सदस्यों को अदालत के काम से दूर रहने या अदालतीय कार्यवाही का बहिष्कार करने के लिए कहने का काम या गतिविधि, न्याय के प्रशासन में हस्तक्षेप के समान है।

अधिवक्ता न्यायालय के अधिकारी होते हैं और उनको समाज में विशेष दर्जा प्राप्त हैं। इसलिए यह उनका दायित्व व कर्तव्य बनता है कि वह न्यायालय के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करें।''

कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों में बार एसोसिएशन अक्सर विभिन्न कारणों से कोर्ट के काम से अनुपस्थित रहने/बहिष्कार करने के कामों में संलिप्त रहती हैं, जिनमें पुलिस अत्याचार, अधिवक्ताओं की मौत/ हमला, जिला बनाने की मांग, न्यायालय की संपत्ति का अतिक्रमण आदि कारण शामिल हैं।

वकीलों को हड़ताल पर जाने का अधिकार नहीं

उन्होंने वकीलों को याद दिलाया कि न्यायालयों से अनुपस्थिति/ बहिष्कार के कार्य या बार एसोसिएशनों के पदाधिकारियों द्वारा अपने सदस्यों को कार्य से विरत या दूर रहने की हिदायत , न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करने के समान है।

उन्होंने पूर्व-कैप्टन हरीश उप्पल बनाम भारत संघ और अन्य(2003) 2 एससीसी 45 के मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया। जिसमें शीर्ष न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वकीलों को हड़ताल पर जाने या काम का बहिष्कार करने का कोई अधिकार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि,

''विरोध, यदि कोई आवश्यक हो, तो केवल प्रेस स्टेटमेंट जारी करके, टीवी साक्षात्कार, कोर्ट परिसर में बैनर लगाकर और या प्लेकार्ड या तख्तियां लेकर, काले या सफेद या किसी भी रंग के आर्म बैंड पहनकर, कोर्ट परिसर के बाहर और दूर शांतिपूर्ण मार्च कर सकते हैं, धरना या भूख हड़ताल आदि किया जा सकता है। यह माना गया कि अपने मुविक्कलों की ओर से वकालत करने वाले वकील हड़ताल या बहिष्कार के आह्वान पर अदालतों में अनुपस्थित नहीं रह सकते। सभी वकीलों को साहसपूर्वक हड़ताल या बहिष्कार के लिए किसी भी आह्वान का पालन करने से मना कर देना चाहिए।''

इस प्रकार, मुख्य न्यायाधीश ने कहा,

''यह व्यथित करने वाला है कि कर्नाटक राज्य के विभिन्न भागों में कुछ बार संघों के सदस्य विभिन्न कारणों से न्यायालयों में अनुपस्थित होने या बहिष्कार करनेका सहारा ले रहे हैं। अदालतों से अनुपस्थित रहने के ऐसे कार्यों से वह न्याय के प्रशासन में हस्तक्षेप कर रहे हैं। इस तरह के कृत्य से वादियों या मुविक्कलों को भी असुविधा और पूर्वाग्रह होता है या उनके साथ भी अन्याय होता है।

इसलिए, मैं राज्य के सभी बार एसोसिएशनों के सभी सदस्यों से अपील करता हूं कि वे कारण की वास्तविकता के बावजूद या भले की कुछ भी कारण हो, कोर्ट के काम में अनुपस्थित होने से बचें या कार्यवाही का बहिष्कार न करें और इस तरह के अवैध काम में लिप्त न हों।''

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