राम जेठमलानी द्वारा लड़े गए ये 10 हाई प्रोफाइल केस

राम जेठमलानी द्वारा लड़े गए ये 10 हाई प्रोफाइल केस

वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी, जिन्हें आम तौर पर आपराधिक कानून के विद्वान् के रूप में माना जाता है, का कल सुबह 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

एक साहसी और जुझारू वकील के रूप में जाने गए जेठमलानी, कई हाई-प्रोफाइल मामलों में पेश हुए हैं। यहां उनमें से कुछ का संक्षिप्त विवरण दिया जा रहा है।

1. नानावटी केस

विभाजन के बाद कराची से बॉम्बे में अपनी कानूनी प्रैक्टिस को शिफ्ट करने वाले जेठमलानी, नानावटी मामले में अपनी उपस्थिति के साथ चर्चा में आये और उन्होंने खूब सुर्खियाँ बटोरी।

उस मामले में, एक नौसेना कमांडर, के. एम. नानावटी पर अपनी पत्नी के प्रेमी, प्रेम आहूजा की हत्या के आरोप में मुकदमा चलाया गया था। इस मामले ने खूब सुर्खियाँ बटोरी, और नानावटी को जनता की सहानुभूति भी प्राप्त हुई।

जेठमलानी से प्रेम आहूजा की बहन ने, अभियोजन की रणनीति में मदद करने के उद्देश्य से, कानूनी टीम का नेतृत्व करने के लिए संपर्क किया था। मामले को एक ज्यूरी के समक्ष रखा गया, जिसने अंततः नानावटी को बरी करने का फैसला किया।

सत्र न्यायाधीश ने यह महसूस किया कि ज्यूरी का फैसला, आम जनता की भावनाओं से प्रभावित था और इसलिए उन्होंने इस मामले को उच्च न्यायालय में भेज दिया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिए गए फैसले को पलट दिया और नानावटी को हत्या का दोषी ठहराया। वाई. वी. चंद्रचूड़, जो बाद में भारत के मुख्य न्यायाधीश बने, इस मामले में सरकारी वकील थे। इस मामले के बाद ज्यूरी परीक्षण की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया था।

2. आपातकाल के दौरान चुनौतियों का सामना करना

जेठमलानी वर्ष 1975 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल के घोर आलोचक थे। केरल के पालघाट जिले में वकीलों द्वारा आयोजित एक समारोह में आपातकाल के खिलाफ बोलने के चलते, उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। लेकिन वह गिरफ्तारी को चकमा देकर बच निकलने में कामयाब रहे।

उन्होंने एडवोकेट्स शांति भूषण, अनिल दीवान आदि के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट के सामने एडीएम जबलपुर के मामले में कई राजनीतिक नेताओं की नजरबंदी को चुनौती दी। गौरतलब है कि इस मामले में अदालत द्वारा सुनाये गए निर्णय की घोर आलोचना में आज भी कोई कमी नहीं आई है।

3. इंदिरा गांधी हत्या कांड

जेठमलानी उन 2 व्यक्तियों के लिए पेश हुए, जिन्हें इस मामले में साजिशकर्ता के रूप में आरोपी बनाया गया था - बलबीर सिंह और केहर सिंह। बलबीर सिंह को कोर्ट ने बरी कर दिया और केहर सिंह को मौत की सजा सुनाई गई।

जेठमलानी ने यह कहकर मामले में अपनी उपस्थिति को लेकर हो रही सार्वजनिक आलोचना का जवाब दिया, कि वह केवल एक वकील के रूप में अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।

"मैं अपने विवेक के अनुसार निर्णय लेता हूं कि किसका बचाव करना है। एक वकील, जो इस आधार पर एक व्यक्ति का बचाव करने से इनकार करता है, कि लोग उसे दोषी मानते हैं, वह वकील स्वयं पेशेवर कदाचार का दोषी है", जेठमलानी ने बाद में एक साक्षात्कार में सार्वजनिक रूप से तिरस्कृत आरोपी व्यक्तियों के बचाव के अपने फैसले के बारे में बोलते हुए कहा।

4. राजीव गांधी हत्या का मामला

जेठमलानी, राजीव गांधी हत्या मामले के दोषियों- संथान, मुरुगन और पेरारिवलन- के लिए भी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए, जिसमें उनकी मौत की सजा को बदलने (Commutation) की मांग की गई थी। फरवरी 2014 में, SC ने आरोपियों को मिली मौत की सजा को आजीवन कारावास में इस तर्क को स्वीकार करते हुए बदल दिया कि मौत की सजा के निष्पादन में लंबे समय की देरी, ऐसा करने का एक आधार है।

मुख्य न्यायाधीश पी. सथासिवम की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की बेंच द्वारा दिए गए ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, यह देरी न केवल अत्यधिक थी, बल्कि तर्कहीन और अस्पष्टीकृत भी थी। अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि आजीवन कारावास का मतलब जेल में सम्पूर्ण जीवन बिताना होगा।

5. स्टॉक मार्केट घोटाला

उन्होंने हर्षद मेहता और केतन पारकेह का बचाव किया जो वर्ष 1990 के दशक के शेयर बाजार घोटाले के आरोपी थे। मेहता को बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में हुए 4999 करोड़ के मूल्य के वित्तीय घोटाले में उनकी भूमिका के लिए दोषी ठहराया था।

पारेख को वर्ष 2008 में दोषी ठहराया गया था, जो वर्ष 1998 से 2001 तक भारतीय शेयर बाजार में हुए हेरफेर एवं घोटाले में शामिल था।

6. संसद हमले का मामला

जेठमलानी, संसद हमले के मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के निर्णय के खिलाफ एसएआर गिलानी द्वारा दाखिल अपील में पेश हुए। उसे मृत्युदंड दिया गया था।

उच्च न्यायालय ने उसे वर्ष 2003 में बरी कर दिया था, जिसे बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार कर लिया था। जेठमलानी उसके लिए HC और SC में उपस्थित हुए। गिलानी के बरी होने का स्वागत करते हुए, वरिष्ठ वकील ने कहा, "यह फैसला पूरी दुनिया के, विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर के निवासियों के, भारतीय न्यायिक प्रणाली की अखंडता और सक्षमता में विश्वास को बहाल करेगा। मुझे लगता है कि यह इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ है। मुझे यह भी लगता है कि इससे कश्मीर समस्या को हल करने में मदद मिलेगी। "

7. आय से अधिक संपत्ति मामले में जयललिता के लिए

वे तमिलनाडु की पूर्व सीएम जयललिता की ओर से, आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील में पेश हुए।

जेठमलानी ने 27 सितंबर से परपाना अग्रहारा केंद्रीय जेल में बंद जयललिता की जमानत के लिए चारा घोटाले में लालू प्रसाद मामले का हवाला दिया, जिसमें वह उनके लिए पेश हुए थे। हाईकोर्ट ने लालू मामले में जमानत देने से इंकार कर दिया था, लेकिन इसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर कर लिया।

उच्च न्यायालय ने जयललिता और उनकी सहयोगी शशिकला को आरोपों से बरी कर दिया। बाद में, सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया और फरवरी 2017 में उनकी सजा बहाल कर दी। चूंकि दिसंबर 2016 में जयललिता की मृत्यु हो गई थी, इसलिए उनके खिलाफ मामला रद्द कर दिया गया।

8. जेसिका लाल मामला

वह मनु शर्मा के लिए पेश हुए, जिस पर वर्ष 1999 में दिल्ली में मॉडल जेसिका लाल की हत्या करने का आरोप था। शर्मा को वर्ष 2006 में एक ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था। हालांकि, एक स्टिंग ऑपरेशन के चर्चा में आने के बाद हाईकोर्ट ने मामले का फिरसे ट्रायल किये जाने का आदेश दिया था। उक्त स्टिंग ऑपरेशन में यह खुलासा हुआ कि मामले के गवाहों पर होस्टाइल हो जाने को लेकर दबाव डाला गया था।

जनता के आक्रोश के बीच जेठमलानी ने उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में शर्मा का बचाव किया। जेठमलानी ने इसको लेकर मीडिया की आलोचना की।

'डेविल्स एडवोकेट' शो में करण थापर को दिए एक साक्षात्कार में, जेठमलानी ने इस मामले में अपनी उपस्थिति को यह कहते हुए सही ठहराया कि उनका, 'मीडिया के शातिर हमले से पीड़ित एक व्यक्ति का बचाव करने का दायित्व' था।

9. 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में कनिमोई के लिए

उन्होंने 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में, जिसने यूपीए -2 सरकार को हिलाकर रख दिया, तमिलनाडु के पूर्व सीएम करुणानिधि की बेटी कनिमोई का बचाव किया। वह इस मामले में कनिमोई की जमानत मांगने के लिए पेश हुए, उन्होंने यह दलील दी कि साजिश में उनकी कोई भूमिका नहीं है।

उन्हें दिसंबर 2017 में विशेष सीबीआई कोर्ट, दिल्ली द्वारा बरी कर दिया गया था। विशेष न्यायाधीश ओ. पी. सैनी ने आरोप साबित करने में अभियोजन पक्ष की विफलता को रेखांकित किया था। सीबीआई ने यह आरोप लगाया था कि 2 जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस के आवंटन में, जिसे 2 फरवरी, 2012 को शीर्ष अदालत ने रद्द कर दिया था, सरकारी खजाने को 30,984 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

10. काले धन का मामला

राम जेठमलानी वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक अलग भूमिका में अर्थात एक याचिकाकर्ता के रूप में पेश हुए, जहाँ वो विदेश में जमा काले धन के मुद्दे पर अदालत द्वारा अपनी निगरानी में जांच कराने की मांग कर रहे थे। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय को यह बताया कि विदेशों में जमा अवैध धन को वापस लाने का सरकार का वादा, "एक भ्रम से भी बदतर" और "राष्ट्र के साथ धोखाधड़ी" थी।

अदालत के समक्ष जाने से पहले, उन्होंने तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखा था कि वे उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं, जिन्होंने विदेशी बैंकों में काला धन जमा किया है। "आप देश को आत्महत्या की ओर ले जा रहे हैं", जेठमलानी ने जेटली से कहा था।

वह विमुद्रीकरण (Demonetization) के फैसले के भी खिलाफ थे, उन्होंने कहा था कि सरकार के इस कदम से काले धन को वापस लाने में मदद नहीं मिलेगी क्योंकि सरकार, विदेशी बैंकों में जमा बेहिसाब धन का पता लगाने के लिए कदम नहीं उठा रही थी।

जेठमलानी जैन हवाला मामले में लालकृष्ण आडवाणी, सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में अमित शाह, चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव और यौन शोषण मामले में आसाराम बापू के लिए भी पेश हुए हैं।

खूंखार अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान भी एक समय उनका मुवक्किल था। भगोड़े डॉन, दाऊद इब्राहिम द्वारा जेठमलानी से बात किये जाने की भी खबर थी, जहाँ उसने भारतीय अदालतों के सामने आत्मसमर्पण करने की इच्छा व्यक्त की थी।

राम जेठमलानी ने वर्ष 2015 में दिवंगत अरुण जेटली द्वारा दायर सिविल और आपराधिक मानहानि के मुकदमों में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का भी प्रतिनिधित्व किया था, जहां पूर्व केंद्रीय मंत्री ने केजरीवाल से हर्जाने के रूप में 10 करोड़ रुपये की मांग की थी।