मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग़ लड़की से बलात्कार करने वाले शिक्षक की मौत की सज़ा को सही बताया [निर्णय पढ़े]

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग़ लड़की से बलात्कार करने वाले शिक्षक की मौत की सज़ा को सही बताया [निर्णय पढ़े]

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग़ से बलात्कार के आरोपी एक शिक्षक की मौत की सज़ा को बरक़रार रखा है। इस शिक्षक ने साढ़े चार साल की एक लड़की के साथ बलात्कार किया था। कोर्ट ने कहा कि इस सज़ा के लिए मौत से कम की सज़ा नहीं दी जा सकती।

न्यायमूर्ति पीके जायसवाल और न्यायमूर्ति अंजुली पालो ने निचली अदालत के फ़ैसले को सही ठहराया और सज़ा कम करने की उसकी अपील ठुकरा दी। 28 वर्षीय आरोपी ने निचली अदालत के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की थी।

इस शिक्षक के खिलाफ आरोप यह है कि उसने 1 जुलाई 2018 की रात को जब यह नाबालिग़ लड़की अपने पिता के साथ सो रही थी, वह उसके पिता से मिलने आया और थोड़ी देर बाद चला गया। जब आधी रात को इस लड़की का पिता पेशाब करने के बाद वापस आया तो उसे अपनी बेटी वहाँ नहीं दिखी। बाद में यह लड़की धीर सिंह नामक एक व्यक्ति के खेत में अचेत अवस्था में पाई गई। उसके गुप्तांग से ख़ून निकल रहा था।

पुलिस को सूचना दी गई और लड़की को अस्पताल भेजा गया जहाँ उसे दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भेज दिया गया। बाद में आरोपी को भी गिरफ़्तार कर लिया गया।

आरोपी के इस अपील पर कि उसकी सज़ा को कम कर दिया जाए, कोर्ट ने कहा, "वर्तमान मामले में अपीलकर्ता ने साढ़े चार साल की एक बच्ची से बलात्कार कर एक बहुत ही अमानवीय और क्रूर कृत्य किया है…इस बात की ज़्यादा आशंका है कि यह लड़की कहीं मर न जाए।"

कोर्ट ने Purushottam Dashrath Borate vs. State of Maharashtra मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर भरोसा करते हुए अपना फ़ैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने कोर्ट ने कहा कि इस तरह की घटना का पीड़ित के दिमाग़ पर दीर्घकालिक असर होता है। यह लड़की सिर्फ़ साढ़े चार साल की है और उसके साथ जो हुआ है उसका उस पर जीवन भर असर रहेगा। लड़की के परिवार वालों को यातनाएँ झेलनी पड़ी हैं।

कोर्ट ने इस संदर्भ में 16 दिसम्बर 2012 के सामूहिक बलात्कार मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का भी हवाला दिया।